बुंदेलखंड की गंगा मानी जाने वाली बेतवा नदी में अब नाले का गंदा पानी नहीं गिरेगा। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) के निर्देश के बाद नगर निगम ने नाले के बायो रेमीडिऐशन की प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी की है। नाले पर प्लांट लगाकर करीब 14 एमएलडी पानी को साफ कर नदी में छोड़ा जाएगा।
दरअसल, महानगर के कई नाले नदियों में गिरते हैं। इनसे नदियों का पानी दूषित होता है। बुंदेलखंड की गंगा बेतवा नदी में भी हंसारी नाले का गंदा पानी गिरता है। इसके लिए पिछले दिनों एनजीटी ने निर्देश जारी किए थे।
एनजीटी ने कहा था कि नालों का पानी गिरने के लिए निगम व्यवस्था करे। किसी भी हाल में दूषित पानी नदियों में नहीं गिरना चाहिए। उचित उपाय न करने पर एनजीटी ने अर्थदंड लगाने के साथ जिम्मेदारों पर कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी। इसके बाद नगर निगम ने हंसारी नाले के बायो रेमीडिशन की तैयारी शुरू कर दी है। इसके तहत नाले के पास प्लांट लगाकर गंदगी और कचरे को अलग किया जाएगा। जिसके बाद शुद्ध पानी को नदी में छोड़ा जाएगा। करीब 60 लाख रुपये की लागत से होने वाले कार्य के लिए नगर निगम ने टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है।
ऐसे होगा नाले के पानी का शोधन
हंसारी नाले को एक बड़े टैंकनुमा कंपाउंड से जोड़ा जाएगा। नाले के पानी को उस कंपाउंड में लाकर और उसमें खास केमिकल डालकर पानी का बायो रेमीडिएशन किया जाएगा। पानी से बैक्टीरिया और गंदगी को खत्म करके बेतवा नदी में छोड़ा जाएगा।
हंसारी नाले के बायो रेमीडिएशन की प्रक्रिया चल रही है। इसमें नाले पर प्लांट लगाकर पानी को शुद्ध किया जाएगा। टेंडर निकालकर आवेदन मांगे गए हैं। जल्द ही अन्य नालों पर भी प्लांट लगाए जाएंगे।- अमित शर्मा, अधिशासी अभियंता नगर निगम