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झांसी : एक साथ चौबीस तीर्थंकरों के दर्शन कर धन्य हो रहे भक्त

Mon, 13 Sep 2021 02:24 PM IST
झांसी ब्यूरो अमर उजाला ब्यूरो, झांसी

सार

महानगर में जैन मंदिरों की एक से बढ़कर एक अनूठी विशेषताएं हैं। नगरा में बने महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजित चौबीस तीर्थंकरों की प्रतिमाओं के दर्शन कर भक्तों को आत्मिक शांति मिलती है। मंदिर में धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। वहीं वर्ष में दो बार रथयात्रा का आयोजन होता है। पर्यूषण पर्व में यहां सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ती है।
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jain mandir
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विस्तार
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महानगर से एक छोर पर बसे नगरा क्षेत्र में करीब 50 परिवार निवास करते हैं। करीब 50 साल पहले महज 12 जैन परिवार थे। क्षेत्र में कोई जैन मंदिर नहीं था। श्रावक-श्राविकाओं को दर्शन और पूजन के लिए करीब तीन किलोमीटर दूर सीपरी बाजार जैन मंदिर आना पड़ता था। वर्ष 1975 में जैन परिवारों ने मिलकर क्षेत्र में जैन मंदिर की नींव रखी। श्रावक रूपचंद जैन ने जैन मंदिर के लिए एक प्लॉट दान स्वरूप दिया। जिसमें एक कोने पर भगवान महावीर की प्रतिमा की स्थापना की गई। इसके बाद क्षेत्र में धर्म प्रभावना बढ़ने लगी, तो मंदिर का आकार भी बढ़ता गया।

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चौबीस तीर्थंकरों की प्रतिमाएं
आज यहां विशाल शिखरबद्ध मंदिर बन गया है। मंदिर में भूतल पर भगवान महावीर के साथ भगवान आदिनाथ, भगवान चंद्रप्रभु की प्रतिमा है। इसके साथ ही प्रथम तल पर जैन धर्म के चौबीस तीर्थंकरों की प्रतिमाएं और भगवान बाहुबली, शांतिनाथ, कुंथनाथ और अरहनाथ की प्रतिमाएं हैं। मंदिर का पंचकल्याणक प्रतिष्ठा महोत्सव वर्ष 2015 में आचार्य ज्ञान सागर महाराज के सानिध्य में हुआ।

वर्ष दो बार रथयात्रा का आयोजन
इसके बाद वर्ष 2020 में मुनि आदित्य सागर महाराज ने यहां चार्तुमास किया। मंदिर में धार्मिक आयोजन होते रहते हैं। वहीं में वर्ष दो बार रथयात्रा का आयोजन होता है। पर्यूषण पर्व में यहां सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ती है। नगरा में बने महावीर दिगंबर जैन मंदिर में विराजित चौबीस तीर्थंकरों की प्रतिमाओं के दर्शन कर भक्तों को आत्मिक शांति मिलती है
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कहते हैं श्रद्धालु
मंदिर की नींव 47 वर्ष पूर्व रखी गई थी। यहां भगवान महावीर की मनोहारी प्रतिमा के दर्शन कर भक्तों को शांति मिलती है।- नेमीचंद्र जैन

मंदिर में विराजमान चौबीस तीर्र्थंकरों की प्रतिमाओं के दर्शन कर सारे दुख दूर हो जाते हैं। भगवान महावीर की प्रतिमा अतिशयकारी है।- आशीष जैन

क्षेत्र के लोगों को पहले शहर जाना पड़ता है। मंदिर के निर्माण के बाद से श्रावकों को राहत मिली। साथ ही धर्म की खूब प्रभावना हो रही है।- प्रमिला जैन
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