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साइबर अपराधियों ने 130 बेरोजगार से हड़पे 25 लाख

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झांसी। मोटी सैलरी और बड़े-बड़े पैकेज का सब्जबाग दिखाकर साइबर क्रिमिनल बेरोजगार युवाओं को ठग रहे हैं। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि नौकरी के नाम पर एक साल में 130 बेरोजगारों को साइबर अपराधी ठगी का शिकार बना चुके हैं, जिनसे 25 लाख रुपये से अधिक की रकम ठगी जा चुकी है। पुलिस द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाने के बाद भी बेरोजगार साइबर अपराधियों के जाल में फंस रहे हैं। नए-नए पैंतरे अपनाकर वे जरायम के इस कारोबार को अंजाम दे रहे हैं। हाल ही में ठगी के इसी तरह के मामले में एक छात्रा की जान चली गई। गुमनावारा निवासी जगमोहन पाराशर की पुत्र यशस्वी पाराशर से नौकरी के नाम पर 48,500 रुपये ठग लिए गए थे। इस घटना का उन पर गहरा आघात हुआ था। इसी अवसाद में उन्होंने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।
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केस - 1
सर्वेयर बनने की लालच में गंवाई रकम
झांसी। सिविल लाइन निवासी अंकित कुमार को जानकारी हुई थी कि एक प्रतिष्ठित कंपनी में गांवों के डाटा इकट्ठा करने के लिए सर्वेयरों की आवश्यकता है। 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन के अलावा लगभग 12 हजार रुपये प्रतिमाह डेली अलाउंस भी दिया जाएगा। उन्होंने डेढ़ हजार रुपये शुल्क जमा कर ऑनलाइन आवेदन कर दिया। इसके बाद तीन हजार रुपये टेस्ट की फीस जमा कराई गई। कंपनी की ओर से टेस्ट में पास होने की जानकारी दी गई और बतौर सिक्योरिटी 20 हजार रुपये जमा करने को कहा गया। ये रकम मांगे जाने के बाद उन्हें समझ में आ गया था कि वे फ्रॉड का शिकार हुए हैं। कंपनी से पैसे वापस लेने के लिए उन्होंने कई बार मेल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बाद में वे थक हारकर बैठ गए।
केस - 2
कॉल सेंटर में नौकरी के नाम पर 18 हजार ठगे
झांसी। बड़ाबाजार निवासी विवेक कुमार को जानकारी हुई कि नोएडा के कॉल सेंटर में वैकेंसी निकली हुई है। कंपनी की ओर से सालाना 4.20 लाख रुपये का पैकेज देने का ऑफर दिया गया था। शैक्षिक योग्यता महज स्नातक मांगी गई थी। भाषा की कोई बाध्यता नहीं थी। ऑनलाइन आवेदन शुल्क एक हजार रुपये निर्धारित किया गया था, जो उन्होंनेे जमा किया। कंपनी की ओर से जॉब ऑफर भेज दिया गया। बताया गया कि उन्हें फिलहाल वर्क फ्रॉम होम करना है। कंपनी की ओर से लैपटॉप भेजा जा रहा है, इसकी सिक्योरिटी राशि 17 हजार रुपये वे जमा कर दें। ये रकम जमा करने के बाद कंपनी की ओर से न लैपटॉप आया और न ही कोई जवाब।
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केस - 3
व्यापार शुरू कराने के नाम पर 22 हजार हड़पे
झांसी। बड़ागांव गेट बाहर निवासी सौरभ को सोशल मीडिया के जरिये जानकारी हुई थी कि सेनिटाइजर बनाने वाली कंपनी वितरक नियुक्त करना चाहती है। उन्होंने कंपनी से संपर्क किया। कंपनी की ओर से कुछ शर्तें रखीं गईं थीं, जिन्हें उन्होंने पूरा कर दिया। उनसे 22 हजार रुपये जमा करने का कहा गया और बताया गया डेढ़ लाख रुपये का माल भेजा जा रहा है, जिसे बेचने पर उन्हें 35 हजार रुपये का नेट प्रॉफिट होगा। पैसा जमा करने के बाद वे माल का इंतजार करते रहे, लेकिन नहीं आया। कुछ समय बाद कंपनी के प्रतिनिधि का भी मोबाइल बंद जाने लगा। तब उन्हें जानकारी हुई कि वे ठगी का शिकार हो गए हैं।
केस - 4
समय रहते जागने से बच गए 35 हजार
झांसी। मानिक चौक निवासी अमित ने एक नामचीन इलेक्ट्रानिक्स कंपनी में जॉब के लिए आवेदन किया था। आवेदन के कुछ समय बाद बाकायदा उनका ऑनलाइन इंटरव्यू लिया गया था। उसके बाद उन्हें कंपनी की तरफ से सिलेक्ट होने की जानकारी दी गई। लैपटॉप उपलब्ध कराने, जीएसटी जमा करने, कोरियर खर्च आदि के नाम पर उनसे 35 हजार रुपये जमा कराए गए। इसी दरम्यान उन्होंने अपने एक जानने वाले को इसकी जानकारी दी, तो उसे कुछ शक हुआ। पड़ताल करने पर पाया कि बड़ी कंपनी के नाम से मिलता-जुलता नाम रखकर ठगी की जा रही है। उन्होंने तत्काल पुलिस की साइबर सेल से संपर्क किया। पुलिस ने बगैर दे किए उनका पैसा निकलने से पहले साइबर क्रिमिनल का खाता फ्रीज करा दिया। बाद में उन्हें ये रकम वापस मिल गई।
तत्काल करें 112 पर सूचना: एसपी सिटी
झांसी। एसपी सिटी विवेक त्रिपाठी ने बताया कि नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले संबंधित कंपनी के विषय में पूरी तस्दीक कर लें। लुभावने वेतन और पैकेज की लालच में न पड़ें। इसके लिए पुलिस की ओर से लगातार जागरूकता अभियान भी चलाए जा रहे हैं। इसके बाद भी यदि साइबर क्राइम का शिकार हो जाएं तो तत्काल पुलिस को सूचना दें। सूचना नेशनल हेल्पलाइन नंबर 155260 के अलावा 112 पर भी दी जा सकती है। पुलिस का 112 नंबर सभी बैंकों से जुड़ा हुआ है। सूचना मिलते ही तत्काल जिस खाते में रकम भेजी गई है, उसे फ्रीज करा दिया जाता है। बाद में रकम वापस मिल जाती है। तमाम मामलों में रकम वापस कराई जा चुकी है।
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