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सीटी स्कैन से पता चलेगा हार्ट ब्लॉक, गर्भ में पल रहे बच्चे की हो सकेगी एमआरआई

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झांसी। बुंदेलखंड वासियों को इलाज के लिए दूरदराज नहीं जाना पड़ेगा। मेडिकल कॉलेज में ही सीटी स्कैन से हार्ट ब्लॉक का पता चल सकेगा। गर्भ में पल रहे बच्चे की भी एमआरआई जांच हो सकेगी। इससे पता चलेगा कि गर्भस्थ शिशु में कोई अनुवांशिक रोग तो नहीं है। 25 करोड़ से थ्री टेस्ला की एमआरआई और 256 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीन आएगी।
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मेडिकल कॉलेज के रेडियोलॉजी विभाग में 10-12 साल पुरानी 0.3 टेस्ला की एमआरआई और 16 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीन हैं, जो बेहद पुरानी हो चुकी हैं। बार-बार ये मशीनें खराब हो जाती हैं। जांच रिपोर्ट भी बहुत सटीक न आने पर बड़े शहरों को जाना पड़ता है। पांच से आठ हजार तक की जांच हर किसी के लिए करा पाना संभव भी नहीं है। अब शासन ने मेडिकल कॉलेज को बड़ी सौगात देते हुए मशीनों की खरीद को मंजूरी दे दी है। इमरजेंसी कोविड रिस्पांस प्रिपेयरनेस फेज-2 के तहत लगभग 25 करोड़ की मशीनें खरीदी जाएंगी। कॉलेज प्रशासन ने भी शासन को प्रस्ताव भेज दिया है। संभावना जताई जा रही है कि मार्च तक ये मशीनें मेडिकल कॉलेज में आ जाएंगी। कॉलेज के अधिकारियों ने बताया कि अभी इतनी आधुनिक मशीनें पूरे बुंदेलखंड में कहीं नहीं हैं।
कम समय लगेगा, ज्यादा जांच होगी
अभी एमआरआई जांच कराने पर 40 से 45 मिनट लगते हैं। यदि मरीज हिल जाता है तो फिर से जांच करनी पड़ती है। वहीं, नई मशीन से महज 10 मिनट में ही एमआरआई की जांच हो सकेगी। अभी 10 जांच ही रोज हो पाती हैं। जबकि, नई मशीन से 25 जांचें रोजाना हो पाएंगी। साथ ही सीटी स्कैन भी 45 सेकेंड में हो जाएगा, जिसे अभी दो से ढाई मिनट लगते हैं।
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ये हैं मशीनों की खासियत
जब युवा का बीपी बढ़ा हुआ होता है और किडनी फंक्शन टेस्ट कराने पर रिपोर्ट सामान्य आती है तो किडनी की एंजियोग्राफी कराते हैं। इससे पता चलता है कि किडनी की नसों में ब्लॉकेज तो नहीं है। साथ ही लिवर में सूजन आने और बार-बार पीलिया होने पर खून की जांच, अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट में स्थिति साफ नहीं हो पाती तो इसकी एंजियोग्राफी करानी पड़ती है। वहीं, बार-बार चक्कर आने, लकवा पड़ने पर दिमाग की एंजियोग्राफी कराने की जरूरत पड़ती है। ये भी थ्री टेस्ला एमआरआई मशीन से हो सकेगी। इसके अलावा अभी हार्ट में ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए कैथ लैब में जाकर नली डालकर पता लगाना पड़ता है। जबकि, 256 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीन से जांच कराने पर ही इसका पता लगेगा। ये सब जांचें बिना कंट्रास्ट का इंजेक्शन दिए ही हो सकेगा।
शासन के निर्देश पर थ्री टेस्ला की एमआरआई और 256 स्लाइस की सीटी स्कैन मशीन खरीद का प्रस्ताव भेज दिया है। जल्द ही ये मशीनें मेडिकल कॉलेज में आ जाएंगी। सीटी स्कैन से हार्ट का ब्लॉकेज और गर्भस्थ शिशु की भी एमआरआई हो पाएगी। - डॉ. एनएस सेंगर, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।
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