झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में जल्द ही गंभीर मरीजों का इलाज पीजीआई के क्रिटिकल केयर स्पेशिलिस्ट की निगरानी में शुरू होगा। कॉलेज में 12 करोड़ से क्रिटिकल केयर मेडिसिन वार्ड बनाया जा रहा है। ऐसा योगी सरकार की टेली आईसीयू योजना के तहत किया जा रहा है।
गंभीर बीमारी होने पर मरीज अच्छे से अच्छे अस्पताल में इलाज करना चाहता है। मरीजों की प्राथमिकता एम्स और पीजीआई में भर्ती होने की होती है लेकिन वहां देश भर के रोगियों की भीड़ होने के चलते हर कोई इन बड़े चिकित्सालयों में इलाज नहीं करा पाता है। मरीजों को मेडिकल कॉलेजों में ही बेहतर इलाज मिले, इसके लिए योगी सरकार ने टेली आईसीयू योजना शुरू की है। योजना के पहले चरण में झांसी समेत प्रदेश के छह मेडिकल कॉलेजों को शामिल किया गया है। झांसी मेडिकल कॉलेज में 12 करोड़ से 20 बेड का क्रिटिकल केयर मेडिसिन वार्ड बनाया जा रहा है। इस वार्ड में आधुनिक मशीनें भी होंगी। जबकि, पीजीआई में कमांड सेंटर बनेगा, जहां गंभीर मरीजों के इलाज से संबंधित पूरा डाटा दिखेगा। झांसी के डॉक्टर पीजीआई के स्पेशिलिस्ट से लगातार सलाह लेते रहेंगे। पीजीआई के स्पेशिलिस्ट का वेंटिलेटर पर उनका कमांड रहेगा। एक तरह से कहा जाए तो मरीज झांसी में भर्ती जरूर होगा लेकिन उसका इलाज पूरी तरह पीजीआई में भर्ती रोगी की तरह ही होगा।
दो महीने में शुरू होगा, टीम गठित
टेली आईसीयू योजना का लाभ मरीजों को दो महीने में मिलना शुरू हो जाएगा। वहीं, मेडिकल कॉलेज ने भी चार सदस्यीय डॉक्टरों की टीम गठित कर दी है। टीम में मेडिसिन विभाग से डॉ. जकी सिद्दीकी, डॉ. कुलदीप चंदेल और एनेस्थीसिया विभाग से डॉ. छवि सहगल, डॉ. महेश वर्मा को शामिल किया गया है।
प्रदेश सरकार ने टेली आईसीयू योजना शुरू की है। पहले चरण में झांसी मेडिकल कॉलेज को भी शामिल किया गया है। 12 करोड़ से 20 बेड का क्रिटिकल केयर मेडिसिन वार्ड बनेगा। आधुनिक मशीनें होंगी। पीजीआई में कमांड सेंटर बनेगा। वहां के डॉक्टर मरीज पर निगरानी रखेंगे। कभी भी डाटा देख सकेंगे। इलाज के संबंध में भी जानकारी देते रहेंगे। - डॉ. रामबाबू सिंह, नोडल अधिकारी, क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभाग।