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न्यायालय ने दिए उरई कोतवाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश

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झांसी। औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम में प्रावधान न होने के बाद भी एफआईआर दर्ज करने के मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अख्तियार किया है। पुलिस द्वारा अभियुक्तों को रिमांड पर लेने के लिए प्रस्तुत किए गए प्रार्थना पत्र को न्यायालय ने खारिज कर दिया। साथ ही उरई कोतवाल के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करने के निर्देश देते हुए रिपोर्ट मांगी है। जालौन के डीएम और एसपी को इस मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
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जालौन जिले की उरई कोतवाली पुलिस ने दवा के थोक कारोबारी उरई के इंदिरा नगर निवासी जितेंद्र सिंह परिहार व जालौन के थाना आटा निवासी मूलचंद्र उर्फ मूलचरन के खिलाफ पिछले सप्ताह शुक्रवार को औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। दोनों को गिरफ्तार कर न्यायालय विशेष न्यायाधीश (औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम) /अपर सत्र न्यायाधीश नितेंद्र कुमार की अदालत में पुलिस ने अभियुक्तों को रिमांड पर लेने के लिए प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया था। जबकि, बचाव पक्ष के अधिवक्ता का कहना था कि औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम के तहत पुलिस सीधे एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती है। इस अधिनियम में सक्षम न्यायालय में वाद दाखिल करना होता है। उन्होंने अदालत के समक्ष इसे लेकर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग भी प्रस्तुत कीं।
अदालत ने पूरे मामले की सुनवाई के बाद पुलिस के ओर से प्रस्तुत की गई दोनों अभियुक्तों को रिमांड पर लेने की अर्जी को खारिज कर दिया। साथ ही अदालत ने कहा कि अभियुक्त न्यायिक अभिरक्षा में हैं। दोनों अभियुक्तों को 20-20 हजार रुपये का व्यक्तिगत बंधपत्र लेकर अविलंब रिहा किया जाए। साथ ही न्यायालय ने इस मामले में पुलिस की कार्रवाई को औषधि और प्रसाधन सामग्री अधिनियम का उल्लंघन तथा सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवहेलना माना, इस पर उरई कोतवाली प्रभारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के निर्देश दिए। इसकी 25 अगस्त तक रिपोर्ट प्रस्तुत करने को भी कहा। इसके अलावा जालौन जिले के डीएम व एसपी को इस मामले में आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
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