झांसी। पानी की कमी से जूझ रहे जिले के कई इलाकों की प्यास बुझाने के लिए यहां 40 तालाबों को गहरा किया जाना था और 39 चेकडैम बनाए जाने थे। इसके लिए 30 करोड़ रुपये का बजट भी था। बावजूद, काम नहीं हो पाया। इस काम की शुरुआती प्रक्रिया में ही भ्रष्टाचार की दखल हो गई। पोल खुली तो टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी गई। दुबारा टेंडर हो नहीं पाए, जिससे बजट वापस हो गया। खामियाजा किसान भुगत रहे हैं। उनके पास बुवाई तक के लिए पानी का इंतजाम नहीं है। सिंचाई तो अभी दूर की बात है।
साल की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में पानी की कमी दूर करने की कवायद शुरू कर दी गई थी। बारिश के पानी को रोककर और तालाबों को गहरा कर भूगर्भ जल स्तर बढ़ाने की तैयारी थी। इसके लिए केंद्र सरकार की ओर से 30 करोड़ रुपये का बजट उपलब्ध कराया गया था। तालाबों के गहरा करने और चेकडैम बनाने का ज्यादातर काम पानी की कमी से जूझ रहे गरौठा क्षेत्र में किया जाना था। काम कराने की जिम्मेदारी लघु सिंचाई विभाग को सौंपी गई थी। पारदर्शिता के लिए ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी। लेकिन, इसमें भी सेंधमारी हो गई।
विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से ठेकेदारों के बीच पूल बन गया। मामला संज्ञान आने पर प्रशासन ने जांच कराई तो पोल खुल गई। इस मामले में अधिशासी अभियंता, दो अवर अभियंता व एक लिपिक को निलंबित कर दिया गया था। साथ ही तीन दर्जन ठेकेदारों को काली सूची में डाल दिया गया था। लेकिन, इस सब का खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ा। विभाग दोबारा टेंडर करा नहीं पाया, जिससे सरकार ने पैसा वापस ले लिया। किसान अब भी पानी को तरस रहे हैं। कई क्षेत्रों में तो रबी की बुवाई का पलेवा तक नहीं हो पाया है।
तय अवधि में टेंडर प्रक्रिया पूरी न होने की वजह से सरकार ने पैसा वापस ले लिया। हालांकि, बजट फिर से जारी होेने की संभावना है। बजट आते ही टेंडर प्रक्रिया पूरी कर काम कराया जाएगा।
- डॉ. अनुराग गुप्ता, अधिशासी अभियंता - लघु सिंचाई विभाग
टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी पकड़े जाने के बाद दुबारा ये नहीं हो पाई, जिससे पैसा वापस हो गया। हालांकि, दुबारा पैसा आवंटित कराने की कोशिशें की जा रही हैं। बजट जारी होने की पूरी उम्मीद है।
- जवाहर लाल राजपूत, गरौठा विधायक
सरकारी योजनाओं में भ्रष्टाचार रोकना अच्छी बात है। लेकिन, काम के लिए उपलब्ध कराया गया पैसा वापस नहीं लिया जाना चाहिए था। खासतौर पर पानी से जुड़ी योजनाएं क्षेत्र में प्राथमिकता पर ली जानी चाहिए।
- जनक सिंह गौर, रानापुरा
इस साल जिले में सबसे कम बारिश हमारे क्षेत्र में हुई है, जिससे भूगर्भ जल का स्तर रसातल में पहुंच गया है। चेकडैम बन जाने और तालाबों के गहरे होने से इसमें बढ़ोत्तरी होती। सरकार को पैसा उपलब्ध कराना चाहिए।
- सूरज माते, खिरिया
क्षेत्र के कई इलाकों में किसान पानी की कमी से जूझ रहे हैं। हालात ये हैं कि किसानों के पास बुवाई तक के लिए पानी नहीं है। बावजूद, पैसा वापस हो गया। भ्रष्टाचार किसी ने किया और उसका खामियाजा किसान भुगत रहे हैं।
- रविंद्र स्वामी, गुरसराय
सरकार को किसी दूसरे मद से पैसा उपलब्ध कराना था। इस पूरे मामले में किसानों का कहीं कोई दोष नहीं है। लेकिन, मार सबसे ज्यादा उन पर ही पड़ी है। किसान अपने प्यासे खेतों की प्यास नहीं बुझा पा रहे हैं।
- कृष्णपाल सिंह सेंगर, नारायणपुरा गुरसराय
एक ओर तो किसानों की आयु दोगुनी करनी की बात कही जा रही है, वहीं दूसरी ओर खेतों के लिए पानी तक का इंतजाम नहीं है। ऐसे में आय बढ़ना तो दूर की बात, किसानों के लागत तक निकालना मुश्किल हो जाता है।
- हरिमोहन शर्मा, लखावती