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कोरोनाः कमाल है झांसी और बेमिसाल हैं झांसी के लोग

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झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण पर काबू पाने के लिए आज से ठीक एक साल पहले 22 मार्च 2020 को एक दिन का जनता कर्फ्यू लगाया गया था। इसके बाद 25 मार्च से लॉकडाउन लागू कर दिया गया था। इस एक साल के दरम्यान ये महामारी जिले में 10,571 लोगों को अपनी गिरफ्त में ले चुकी है। हालांकि, बीच में संक्रमण की रफ्तार मंद पड़ गई थी। लेकिन, अब एक बार फिर इसमें तेजी देखने को मिल रही है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मार्च माह में ही 110 नए मरीज सामने आ चुके हैं। इसके साथ ही बढ़ गईं हैं हम सब की चुनौतियां, जिसका मुकाबला हम सतर्कता से ही कर सकते हैं।
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एक साल पहले मार्च माह में कोरोना वायरस के संक्रमण ने दस्तक दी थी। शुरुआत के दौर में संसाधनों का टोटा था। लेकिन, अब इस महामारी से निपटने के लिए चिकित्सीय सेवाएं पहले की तुलना में काफी समृद्ध हो चुकी हैं। इतना ही नहीं, अब इसकी वैक्सीन भी मौजूद है। सबसे बड़ी बात इस महामारी से निपटने का हमने अनुभव भी हासिल कर लिया है। यानी की पहले की तुलना में अब इस महामारी को मात देना ज्यादा आसान हो गया है।
सावधान हो जाइए, सतर्क हो जाइए, अपने और अपनों को बचाने के लिए मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपाय अनिवार्य रूप से अपनाइए। साथ ही, कोरोना की वैक्सीन लगवाने के लिए खुद से आगे आइए। ताकि, हमें अब एक बार फिर से पिछले साल जैसे दुखद मंजराें का सामना न करना पड़े। गली-गली में एंबुलेंसों के सायरन की आवाज गूंजती थीं और मरीज के अस्पताल जाने पर परिजनों में चीखपुकार मच जाती थी। कोरोना संक्रमित की मौत पर अपने भी अंतिम संस्कार से कन्नी काट जाते थे, जबकि गैर मुखाग्नि की अंतिम रस्म निभाते थे। कहीं सैकड़ों किमी दूर से पैदल चलकर आए मजदूरों का रैला था, तो कहीं पेट की आग बुझाने के लिए खाने के पैकेट का इंतजार करते लोग।
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174 ने गंवाई जान
झांसी। कोराना वायरस के संक्रमण से मौत का पहला मामला झांसी में चार मई को सामने आया था। इसके बाद महीनों रोजाना मौत के मंजर नजर आए। सरकारी आंकड़ों में 174 कोरोना संक्रमितों की मौत दर्ज है। लेकिन, अन्य कई लोगों ने भी इस महामारी की चपेट में आकर जान गंवाईं। तमाम लोग झांसी के बाहर अपना इलाज कराने गए और फिर वापस लौटकर नहीं आए। एक ही परिवार के दो नौजवान भाइयों की दो दिन के अंतराल में कोरोनो से हुई मौत से पूरी झांसी की आंखों को नम कर दिया था। किसी ने अपने पिता को खोया तो किसी ने पति को। भरापूरा परिवार होने के बाद भी गैरों ने शवों का अंतिम संस्कार किया।
10,308 दे चुके हैं महामारी को मात
झांसी। कोरोना वायरस के संक्रमण की चपेट में जिले के अब तक 10,571 लोग आ चुके हैं। लेकिन, इनमें से 10,310 को डिस्चार्ज किया जा चुका है। इस महामारी को मात देकर इन लोगों की सकुशल घर वापसी हो चुकी है। वर्तमान में जिले में 87 सक्रिय संक्रमित हैं। इनमें से ज्यादातर मार्च माह में ही इस बीमारी की चपेट में आए।
1,836 घर पर रहकर की जीत गए जंग
झांसी। शुरुआत में कोरोना मरीजों को अस्पताल में दाखिल किया जा रहा था। गंभीर मरीजों को महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में ले जाया जा रहा था, जबकि सामान्य मरीजों को एल - 1 अस्पतालों में दाखिल किया जा रहा था। 22 जुलाई से होम आइसोलेशन की व्यवस्था की शुरू की गई थी। सामान्य मरीजों को कोविड प्रोटोकाल का पालन करते हुए घर पर आइसोलेशन पीरियड काटने की इजाजत दी गई थी। जिले में अब तक 1,836 लोग होम आइसोलेशन में रहकर स्वस्थ हो चुके हैं।
5.64 लाख की हो चुकी है जांच
झांसी। कोरोना महामारी से निपटने के लिए जिले में बड़े पैमाने पर जांच अभियान चलाया गया। शुरुआत में केवल आरटीपीसीआर जांच की व्यवस्था थी। लेकिन, इसके बाद ट्रूनेट व एंटीजन जांच भी शुरू की गई। अब तक जिले में 5.64 लाख लोगों की कोरोना की जांच की जा चुकी है। यानी कि जिले की पच्चीस फीसदी से अधिक आबादी का परीक्षण किया जा चुका है। अब भी रोजाना औसतन ढाई से तीन हजार नमूनों की जांच की जा रही है।
अचानक उमड़ पड़े थे प्रवासी मजदूर
झांसी। लॉकडाउन लागू होने के बाद किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि झांसी की सीमाओं की ओर लाखों कदम आगे बढ़ते आ रहे हैं। जी हां, पैदल ही सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय कर प्रवासी श्रमिक यहां पहुंच गए थे। पहले दिल्ली, पंजाब, हरियाणा की ओर से श्रमिक आए और इसके बाद मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र के श्रमिक उमड़ पड़े। बसों और स्पेशल ट्रेनों के जरिये इन श्रमिकों को उनके गंतव्य तक पहुंचाया गया। हफ्तों ये सिलसिला चलता रहा। श्रमिकों की दशा देखकर हर किसी की आंखें नम हो उठतीं थीं। झांसी जनपद के चालीस हजार प्रवासी श्रमिक वापस लौट आए थे। हालांकि, परिस्थितियां सामान्य होने के बाद इनमें से ज्यादातर वापस जा चुके हैं। तीन हजार प्रवासी श्रमिक अब भी झांसी में ही हैं।
भोजन, पानी के प्रबंध में जुटे रहे झांसी वाले
झांसी। प्रवासी श्रमिकों के लिए भोजन-पानी की व्यवस्था करना हो या लॉकडाउन के दरम्यान बेरोजगार हुए लोगों की भूख का प्रबंध करना हो, झांसी के लोगों इसमें कोई कसर नहीं छोड़ी। दिन रात लोगों के भोजन के प्रबंध में झांसी वाले जुटे रहे। समाजसेवियों के अलावा बड़े पैमाने पर जन सामान्य के लोग भी इसमें शामिल रहे। यहां तक की जरूरतमंद तबके तक सीधे राशन की किट पहुंचाई गई और आर्थिक व्यवस्था भी की। नंगे पैर पैदल चले आ रहे श्रमिकों को यहां की महिलाओं ने अपने हाथों से चप्पल तक पहनाईं।
पुलिस के साथ मिलाया कंधे से कंधा
झांसी। लॉकडाउन के दरम्यान लोग अपने घरों से बाहर न निकलें और कोरोना को मात देने के लिए सभी कोविड प्रोटोकाल का पालन करें, इसमें पुलिस के साथ-साथ एनसीसी कैडेट व नागरिक सुरक्षा संगठन के स्वयंसेवियों ने भी बड़ी भूमिका अदा की। ये लोग महीनों पुलिस के साथ पूरी मुस्तैदी के साथ जगह-जगह तैनात रहे।
गली - गली घूमी मेडिकल टीमें
झांसी। कोरोना को मात देने में स्वास्थ्य कर्मियों ने अपनी पूरी ताकत झोंक रखी थी। हॉटस्पॉट व कंटेनमेंट जोन के साथ-साथ महानगर की गलियां हों या सुदूर ग्रामीण इलाके, सभी जगह मेडिकल टीमें घर-घर जाकर जांच में जुटी रहीं। अस्पतालों में भी अपनी जान की परवाह किए बगैर स्वास्थ्य कर्मी अपनी जिम्मेदारी को अंजाम देने में जुटे रहे।
मुफ्त में लग रहा है कोरोना का टीका
झांसी। सरकारी अस्पतालों में कोरोना का टीका मुफ्त लगाया जा रहा है। 60 से अधिक आयु का कोई व्यवस्था बगैर किसी पूर्व पंजीकरण के आसानी से वैक्सीन लगवा सकता है। इसके अलावा 45 से अधिक उम्र के वे व्यक्ति भी वैक्सीन लगवा सकते हैं, जो पहले से किसी बीमारी से ग्रसित है। बीमारी को मात देने के लिए ज्यादा से ज्यादा वैक्सीनेशन जरूरी है।
कोरोना वायरस के मरीजों की संख्या में एक बार फिर से तेजी आई है। हालांकि, प्रशासन इससे निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार है। रोजाना ढाई से तीन हजार जांचे की जा रहीं है। बाहर से आने वाले लोगों की जांच के लिए रेलवे स्टेशन पर भी व्यवस्था की गई है। वैक्सीनेशन का काम भी तेजी से जारी है। वैक्सीनेशन के लिए लोगों को खुद से आगे आना चाहिए। साथ ही मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के उपाय अपनाने चाहिए। मास्क को लेकर सोमवार से सख्ती भी की जाएगी।
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- आंद्रा वामसी, जिलाधिकारी
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