झांसी। जल्द ही बुंदेलखंड के बेर से बनी चॉकलेट और जैम की सप्लाई दुबई और यूके में होगी। इसके लिए दोनों ही देशों की तरफ से मंजूरी मिल गई है। स्टार्ट अप के तहत झांसी की शिवानी बुंदेला ने बेर से कई प्रोडक्ट बनाए हैं। इसमें रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने भी मदद की है।
फूड टेक्नोलॉजी से बीटेक करने वाले शिवानी ने बताया कि वह बेर पर काफी समय से शोध कार्य कर रही थीं। घर पर ही एक हजार स्क्वॉयर फीट की जगह में उन्होंने मिनी लैब और किचन बनाया। यहां पर छोटी-छोटी मशीनों से बेर का जैम, जूस, चॉकलेट बनाई। फिर इन प्रोडक्ट्स की न्यूट्रीशियन वैल्यू जांचने के लिए एनएबीएल लैब भेजा। वहां से सभी प्रोडक्ट को मंजूरी मिल गई। शिवानी ने बताया कि बुंदेलखंड समेत हिमाचल के मंडी में इन उत्पादों की मांग आने लगी है। इसके अलावा ऑनलाइन भी सप्लाई शुरू हो गई है। चूंकि, भारत के बाहर बेर कोे सुपर फ्रूट के नाम से जाना जाता है, क्योंकि इसमें विटामिन सी काफी होता है। ऐसे में तीन महीने पहले उन्होंने बेर से बनी चॉकलेट और जैम के सैंपल दुबई और यूके भेजे थे, इसे वहां मंजूरी मिल गई। मगर जब तक डिमांड आती, उससे पहले ही कोरोना की तीसरी लहर आ गई। अब हालात सामान्य होने से जल्द ही सप्लाई शुरू होने की संभावना है।
कृषि विश्वविद्यालय ने दिए टिप्स
कृषि विश्वविद्यालय के शिक्षा निदेशक डॉ. अनिल कुमार ने बुंदेलखंड एग्रो समिट 2021 में शिवानी को कुछ नया करने का सुझाव दिया। उन्होंने बेर फल को लेकर प्रसंस्करित उत्पादों को बनाने की प्रेरणा दी। इसके बाद निदेशक के निर्देश में ही शिवानी ने विभिन्न उत्पाद बनाने शुरू किए। नए प्रोडक्ट को सबसे पहले कृषि विश्वविद्यालय के अधिकारी ही एप्रूव करते हैं।
महिलाओं, किसानों से खरीद रहीं बेर
इस स्टार्ट के जरिए स्वयं सहायता समूह की महिलाओं और किसानों को भी लाभ हो रहा है। शिवानी ने बताया कि 50 महिलाओं को उन्होंने बेर इकट्ठे कर लाने का काम दिया है। वह आठ से 20 रुपये किलो में बेर खरीदती हैं। इसके अलावा बेर की खेती करने वाले गुरसराय, चिरगांव, बबीना ब्लॉक के 300 किसानों से भी इसी दर पर बेर खरीद रही हैं। उद्यान विभाग से किसानों को सब्सिडी दिलाकर 30 हजार पेड़ लगवाए। अभी 40 हजार और लगेंगे।