झांसी। जानलेवा शीतलहर महिलाओं के लिए आफत बनी हुई है। घर हो या बाहर ठंडी हवा और ठंडा-ठंडा पानी महिलाओं को बीमारी दे रहा है। महिलाएं चिल ब्लेन (हाथ-पैर की उंगलियों का सूजना या ठंड से जलना) से ग्रस्त हो रही हैं। जिला अस्पताल में ऐसी कई महिलाएं घरेलू और कामकाजी महिलाएं पहुंच रही हैं जो ठंड के कारण इससे परेशान हैं। डॉक्टर बता रहे हैं कि इसका इलाज करना बहुत जरूरी है अन्यथा जख्म भी हो सकते हैं।
जनवरी में शीतलहर का प्रकोप इतना ज्यादा है कि पानी को हाथ लगाते ही शरीर कांप उठता है। ऐसे में घर की महिलाएं ही हैं जो दिन भर काम में जुटी रहती हैं। कामकाजी महिलाएं तो घर और बाहर दोनों जगह काम करती हैं। ऐसे में दिन भर घर में खाना-पीना, बर्तन, कपड़े और नहाने धोने के दौरान महिलाएं ठंडे पानी का उपयोग करती हैं। इस मौसम में यही ठंडा पानी उन्हें दर्द दे रहा है। इन्हें चिल ब्लेन की शिकायत हो रही है। जिला अस्पताल के डॉक्टर डीएस गुप्ता बताते हैं कि ठंड में ऐसे तीन-चार केस आ रहे हैं जिसमें महिलाओं के हाथ-पैर की अंगुलियां सूज गई हैं। लाल पड़ चुकीं अंगुलियाें से काम करना मुश्किल हो रहा। स्थिति बिगड़ जाए तो अंगुलियां काली पड़ रहीं, इसमें खुजली बढ़ रही। ऐसा लगता है मानो वह हिस्सा जल गया है। डॉ. गुप्ता ने बताया कि इस समस्या से घरेलू महिलाआें और पुलिस विभाग में काम करने वाली कई महिलाओं के केस आ रहे हैं। इसके लिए उन्हें दवाइयां दी जा रही हैं लेकिन दवा के साथ देखभाल बेहद जरूरी है।
ऐसे करें बचाव
-महिलाएं काम के लिए गुनगुना पानी इस्तेमाल करें।
-ठंडे पानी का काम फटाफट निपटाएं और गुनगुने पानी से सिकाई करें।
-चिल ब्लेन हो जाए तो सिकाई के बाद गुनगुने तेल से उस स्थान पर हल्की मालिश करें।
-बाहर निकलने पर मोजे व दस्ताने पहनकर रखें। दवाई समय से लें।
-नहाने के लिए गुनगुना पानी ही उपयोग करें, ठंडे पानी से ज्यादा कपड़ों की धुलाई से बचें।
-धूप में बैठें और जहां तक संभव हो रात में ठंडे पानी में काम न करें।
बच्चों में बढ़ रहा निमोनिया, ठंड से बचाइए
जिला अस्पताल बाल रोग विभाग में निमोनिया से परेशान बच्चे पहुंच रहे
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। गलन भरी ठंड में बच्चों को ठंड से बचाना बेहद जरूरी है। ठंड के शिकार बच्चों को निमोनिया हो रहा है। जिला अस्पताल में बाल रोग विभाग की ओपीडी में परिजनों के साथ पहुंच रहे कई बच्चों को जांच में निमोनिया निकल रहा है। बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि इस वक्त दो से तीन-चार केस आ रहे हैं। बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और बुखार की समस्या हो रही है। यह समस्या दो वर्ष से पांच छह वर्ष तक के बच्चों में ज्यादा दिख रही है। बच्चे खेल के चक्कर में गर्म कपड़े ठीक से नहीं पहन रहे। सिर पर टोपी नहीं लगाते हैं। ऐसे में बच्चों को ठंड से बचाना जरू री है। माता-पिता ध्यान दें, बच्चों को गर्म पानी पिलाएं, गर्म कपड़े पहनाएं, जूते-मोजे और टोपी अवश्य पहनाएं। ज्यादा समस्या होने पर डॉक्टर को दिखाएं, अपने मन से कोई दवा न दें।