होली का त्योहार नजदीक है। ऐसे में मिलावटखोर बड़े पैमाने पर मिलावट का माल बाजार में खपाने की तैयारी में हैं। इस पर्व पर गुझिया, मिठाइयां, नमकीन खूब खाई और खिलाई जाती हैं।
होली पर मावा का इस्तेमाल सर्वाधिक गुझिया बनाने में किया जाता है। क्योंकि घर घर पकवान बनते हैं लिहाजा मावा की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में मिलावटी मावा बड़े पैमाने पर बेचा जाता है। अगर प्रशासनिक रिपोर्ट को देखेंगे तो पता चलेगा कि अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 तक मावा के 31 सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला में भेजे गए थे। खास बात यह है कि सभी नमूने फेल आए हैं। मावा में बड़े पैमाने पर मिलावट पाई गई है।
विज्ञापन
होली का त्योहार नजदीक है। ऐसे में मिलावटखोर बड़े पैमाने पर मिलावट का माल बाजार में खपाने की तैयारी में हैं। इस पर्व पर गुझिया, मिठाइयां, नमकीन खूब खाई और खिलाई जाती हैं। ऐसे में मावा, घी, तेल, रिफाइंड आदि की खपत काफी बढ़ जाती है। जिले में किस खाद्य पदार्थ में कितनी मिलावट की जा रही है, ये बात खाद्य प्रशासन विभाग की चेकिंग से साबित हो रही है।
अप्रैल 2021 से जनवरी 2022 की रिपोर्ट में सबसे ज्यादा मिलावट मावा और घी में सामने आई है। मावा के सभी 31 और घी के सभी 5 नमूने प्रयोगशाला में हुई जांच में फेल मिले हैं। वहीं, पनीर के 19 में आठ और मिठाइयों के 45 में से 25 सैंपल फेल हो गए हैं। ऐसे में होली पर खाद्य पदार्थों की खरीददारी करते समय ये विशेष ध्यान देने की जरूरत है कि कहीं आप मिलावटी सामान तो नहीं ले रहे।
विज्ञापन
किसके कितने सैंपल हुए फेल
खाद्य सामग्री नमूने लिए फेल हुए
मस्टर्ड ऑयल 70 19
रिफाइंड 27 15
वनस्पति 2 1
नमकीन 21 15
मावा 31 31
होली के मद्देनजर बड़े पैमाने पर चेकिंग अभियान चलाया जाएगा। किसी भी हाल में मिलावटी पदार्थ नहीं बिकने दिया जाएगा। - हरिमोहन श्रीवास्तव, सहायक आयुक्त, खाद्य।