झांसी। याद कीजिए, एक साल पहले का नजारा। 2020 में होली नौ और दस मार्च को थी। अपने- अपने घरों में त्योहार की खुशियां मनाकर देश के कोने-कोने से लोग अपनी नौकरी व व्यापार के लिए लौटे थे। कुछ दिन बाद ही 22 मार्च को एक दिन का जनता कर्फ्यू और उसके बाद 25 मार्च से अप्रत्याशित लॉकडाउन। लगातार बढ़ते कोरोना के मरीज और मौत का बढ़ता आंकड़ा। सब्जी व दूध में भी वायरस का खौफ। सुनसान सड़कें, ऑफिस- बाजार सब बंद...। रोजी-रोटी का संकट। रोजगार छिनते गए, कारोबार चौपट हुए। एक जुलाई से अनलॉक शुरू हुआ। धीरे-धीरे हालात सामान्य होने लगे। लेकिन अब झांसी में एक बार फिर संक्रमण पैर पसार रहा है। होली नजदीक है। सब कुछ सामान्य रहे, खुशियां बरकरार रहें और सब कोरोना के संक्रमण से बचे रहें, इसलिए सामाजिक दूरी का पालन जरूरी है।
अपनों को खोने, इतनी बर्बादी देखने के बाद भी लोग सब भूलते जा रहे हैं। बाजारों, ट्रेन, बस व सार्वजनिक स्थानों पर एक बार फिर पहले ही जैसी चहल- पहल और लापरवाही है। अधिकतर लोग मास्क पहनना भूल गए हैं। हाथ मिलाना और गले मिलना शुरू हो गया है। सरकारी अमला भी आंखें मूंदे है। न पर्याप्त जांचें हो रही हैं और न सख्ती है। लोग मनमानी कर रहे हैं। उन्हें पूरी छूट भी है। महाराष्ट्र समेत तमाम इलाकों में कोरोना तेजी से बढ़ रहा है।
झांसी में भी मार्च की शुरुआत से औसतन दो मरीज रोज मिल रहे हैं। शुक्रवार को भी तीन संक्रमित मिले हैं। अगर अभी नहीं संभले मास्क पहनना, दो गज की दूरी का पालन, साबुन या सैनिटाइजर से बार-बार हाथ धोना बरकरार नहीं रखा तो एक बार फिर तेजी से कोरोना संक्रमण अपनी गिरफ्त में ले सकता है। होली पर अपने - अपने घरों, तीर्थस्थलों या पर्यटन स्थलों पर जाते हुए अपनी, बुजुर्गों, बच्चों और परिजनों को कोरोना से बचाव पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
एक नजर में
- 22 मार्च 2020 को लगा था एक दिन का जनता कर्फ्यू
- 25 मार्च 2020 से लगा था लॉकडाउन, 30 जून 2020 तक रहा
- एक जुलाई से शुरू हुआ अनलॉक, धीरे-धीरे सामान्य हुए हालात
- झांसी में कोरोना से मौत का अब तक का सरकारी आंकड़ा 174, हकीकत में संख्या अधिक
- झांसी में अब तक कुल संक्रमितों की संख्या 10,492
- इस वर्ष 28 और 29 मार्च को होली, बड़ी संख्या में देशभर में लोगों की होगी आवाजाही
मदद को आगे आए थे कोरोना वीर
एक समय था जब हर चीज में मौत का वायरस दिखाई देता था। मजबूरी के इन हालात में अपनों ने भी साथ छोड़ दिया था। लोग परिजनों के अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हो पा रहे थे, तब समाज के अलग-अलग वर्ग से देवदूत के रूप में कोरोना वीर बन कर आए थे। डॉक्टर दिन- रात परिवार से दूर रह कर इलाज कर रहे थे। कुछ चिकित्सक तो नींद के कुछ घंटों में भी डॉक्टर रूम में ही मास्क सिलने बैठ जाते थे। कई समाजसेवी व व्यापारी भूखे और जरूरतमंद लोगों तक खाने का सामान, पानी व दवाएं पहुंचाते रहे। पुलिसवालों ने भी बखूबी सामाजिक उत्तरदायित्व निभाया। लोगों को समझा कर लॉकडाउन का पालन कराया। इसी तरह सफाई कर्मियों ने भी महानगर और अस्पतालों की साफ-सफाई में कोई कसर नहीं छोड़ी, ताकि संक्रमण तेजी से फैल न सके।