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घरेलू कलह से ऊबकर व्यवसाई ने की खुदकुशी

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झांसी। मिशन कंपाउंड में रहने वाले कारोबारी ने घरेलू कलह में खुदकुशी कर ली। सुबह उसका शव पहूज डैम में उतराता हुआ मिला। मौके पर पहुंची सीपरी बाजार पुलिस ने परिजनों को सूचना दी। पुलिस का कहना है कि घरेलू विवाद के बाद कारोबारी दो दिन पहले घर से निकला था। परिवार के लोग तलाश कर रहे थे। पुलिस का कहना है कि कारोबारी ने डैम में कूदकर जान दी है। वहीं कारोबारी की मौत के बाद परिवार में संपत्ति को लेकर विवाद हो गया था। रिश्तेदार संपत्ति मृतक के बच्चों के नाम दर्ज कराने की जिद पर अड़े थे।
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सीपी मिशन मोहल्ले में डामर गोदाम के पास सुरेश चंद वैश्य अपने परिवार के साथ रहते हैं। बड़ा बेटा अतुल गुप्ता उर्फ संगम (45) कुछ समय छोटी-मोटी नौकरी करने के बाद अब कारोबार करने लगा था। छोटा बेटा सावन भी अपना काम करता है। बेटी की शादी छतरपुर (मप्र) में कई वर्ष पहले कर दी लेकिन, वह मायके में ही अपने पति के साथ रहती है। पड़ोसियों ने पुलिस को बताया कि परिवार के बीच झगड़ा हुआ करता है। इसको लेकर संगम तनाव में रहता था। घर भी वह हमेशा देर से आता था। 10 अगस्त की रात को भी घर में पिता-मां के साथ उसका काफी झगड़ा हुआ। काफी देर तक झगड़ा होने के बाद संगम अपनी स्कूटी से रात में ही बिना बताए बाहर चला गया। रात भर वापस न लौटने पर परिजनों ने बुधवार से उसको ढूंढना शुरू किया। सभी नाते-रिश्तेदारी में तलाश के बाद भी उसका कुछ पता नहीं चला। मोबाइल फोन उसका स्विच ऑफ बता रहा था। बृहस्पतिवार सुबह उसका शव डैम में उतराता हुआ मिला। पुलिस ने वहां खड़ी स्कूटी में मिले कागजों से उसकी शिनाख्त की। संगम की मौत की सूचना पुलिस ने उसके परिजनों को दी। मौत की सूचना मिलते ही उसकी पत्नी शालिनी दहाड़ मारकर रोने लगी। पुत्र वंश(14) एवं पुत्री (16 ) स्नेहा भी बिखलने लगे। पुलिस ने डैम से शव को निकालकर उसे पोस्टमार्टम के लिए भिजवा दिया। उधर, मौत की सूचना मिलने के बाद संगम के ससुराल के लोग भी मौके पर पहुंच गए। इंस्पेक्टर सीपरी बाजार के मुताबिक शुरूआती पूछताछ में घरेलू कलह की बात ही सामने आई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद मामला साफ होगा।
हर किसी के दुख-दर्द में साथ खड़ा रहता था संगम
संगम की मौत की सूचना जिसको भी मिली, उसे इसका यकीन नहीं हुआ। संगम की सामाजिक प्रतिष्ठा एक मिलनसार व्यक्ति की थी। मोहल्ले में सभी से उसके अच्छे संबंध थे। कॉलेज के जमाने में संगम ने छात्र राजनीति में भी हाथ अजामाए थे। बीकेडी छात्रसंघ का चुनाव भी उसने लड़ा। अभी भी राजनीतिक कार्यक्रमों में वह सक्रिय रहता था। उसकी मौत की सूचना मिलते ही घर पर लोगों को तांता लग गया। लोग परिजनों को ढांढस बंधा रहे थे। पड़ोसियों का कहना था कि संगम हर किसी के दुख-दर्द में हमेशा साथ खड़ा रहता था। कोरोना के समय में भी उसने कई लोगों की मदद की।
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