झांसी। बुंदेलखंड के नकल माफियाओं के सियासी रसूख के आगे बुंदेलखंड विश्वविद्यालय प्रशासन सरेंडर है। शासन के आदेश हवा में उड़ाए जाते हैं। नेताओं के फोन पर केंद्र बनते हैं। यदि सियासी रसूख रखने वाले कॉलेज के खिलाफ कोई शिकायत आती है तो लीपापोती कर दी जाती है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि रोजाना 30 से 40 कॉलेजों के कैमरे बंद रहे और बीयू खामोश बना रहा।
परीक्षा केंद्र बनने वाले कॉलेज में सीसीटीवी कैमरा होना अनिवार्य है। केंद्र का निरीक्षण करने वाली समिति द्वारा भी इसकी बाकायदा जांच की जाती है। मगर जब परीक्षा शुरू हो जाती है तो नकल माफिया कैमरा बंद कर देते हैं। बीयू ने परीक्षा भवन में सीसीटीवी कैमरों की निगरानी के लिए कंट्रोल रूम भी बनाया है। बड़ा सवाल ये उठता है कि यदि ये कॉलेज कैमरे बंद कराकर नकल करा रहे थे तो क्या इसकी रिपोर्ट कंट्रोल रूम से बीयू अधिकारियों को दी गई। यदि रिपोर्ट दी गई तो बीयू अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की? सूत्रों ने बताया कि अब तक परीक्षा शुरू हुए दस दिन से ज्यादा समय बीत चुका है। इसके बावजूद परीक्षा के दौरान कैमरे बंद होने के बावजूद अब तक किसी कॉलेज के खिलाफ कोई कार्रवाई बीयू प्रशासन ने नहीं की है।
अधिकारी भी सवालों के घेरे में, परीक्षा निरस्त करने में लग गए छह दिन
जालौन के जिस हाजी अनीस कॉलेज खां कन्या इंटर कॉलेज में उड़ाका दल ने 31 मार्च की पहली पाली में सामूहिक नकल की रिपोर्ट दी थी, उसकी परीक्षा निरस्त करने में बीयू को छह दिन लग गए। वो भी तब जब पेपर लीक होने का मामला तूल पकड़ गया। ऐसे में अधिकारियों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।