झांसी। बृहस्पतिवार को वायरल हुए वीडियो में रिश्वत मांग रहे लेखपाल संतोष गौर की बातों पर यकीन करें तो घूसखोरी का पैसा अधिकारियों तक जाता है। वीडियो में लेखपाल साफ-साफ कहता नजर आ रहा है कि उसे एडीएम को पैसा देना है। इससे जाहिर है कि सरकार की जीरो टॉलरिंग पॉलिसी के बड़े-बड़े दावे और वादों के बीच सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार गहरी जड़ें जमाए हुए है।
भ्रष्टाचार मुक्त शासन के वादे के साथ हाल ही में प्रदेश की सत्ता की बागडोर भाजपा ने संभाली है। सत्ता में आने के बाद से सरकार का भी पूरा फोकस समाज को भ्रष्टाचार मुक्त माहौल देने पर है। लेकिन, सिस्टम सरकार की इस मंशा पर खरा नहीं उतर रहा है। इसका अंदाजा बृहस्पतिवार को वायरल हुए लेखपाल संतोष गौर के वीडियो से लगाया जा सकता है। लेखपाल ने अनुसूचित जाति की एक महिला की जमीन की बिक्री की अनुमति देेने के एवज में दो लाख रुपये की रिश्वत मांगी थी। वायरल वीडियो में लेखपाल रिश्वत का पैसा नकद मांग रहा है। साथ ही बेधड़क होकर कहा रहा है कि पैसा उसे एडीएम साहब को भी देना है। हालांकि, लेखपाल की इन बातों में कितनी सत्यता है। ये जांच का विषय है। लेकिन, लेखपाल का वायरल वीडियो सरकारी तंत्र की हकीकत खोलता जरूरत नजर आ रहा है।
सरकार की नीति के तहत हुई कार्रवाई
झांसी। लेखपाल का रिश्वत मांगते हुए वीडियो वायरल होने के बाद बृहस्पतिवार को ज्वाइंट मजिस्ट्रेट /एसडीएम सदर सान्या छाबड़ा व नगर मजिस्ट्रेट राजेश कुमार ने ब्रीफिंग की। उन्होंने बताया कि डीएम रविंद्र कुमार के निर्देश पर लेखपाल संतोष गौर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम व अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई है। साथ ही उसे निलंबित कर दिया गया है। पूरी कार्रवाई राज्य सरकार की भ्रष्टाचार मुक्त नीति के तहत की गई है।