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जिला अस्पताल में निगेटिव ग्रुप का ब्लड खत्म, मेडिकल कॉलेज में बचा सिर्फ दो यूनिट

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झांसी। जिले के सरकारी अस्पतालों के ब्लड बैंकों में निगेटिव ग्रुप के ब्लड का जबरदस्त टोटा हो गया है। जिला अस्पताल में तो एक भी यूनिट निगेटिव ग्रुप का ब्लड नहीं बचा है, जबकि मेडिकल कॉलेज में सिर्फ दो यूनिट ही शेष है। ऐसे में मरीजों को ब्लड के लिए भटकना पड़ रहा है।
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हादसों का शिकार, अस्पताल में भर्ती और ऑपरेशन के दौरान रोगियों को रक्त की जरूरत पड़ती रहती है। ज्यादातर मरीज आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से इन्हीं सरकारी अस्पतालों में ही भर्ती होते हैं। डोनर होने पर सरकारी अस्पताल के ब्लड बैंक से नि:शुल्क रक्त दिया जाता है। जबकि, प्राइवेट ब्लड बैंक काफी पैसे वसूलते हैं। अब सरकारी अस्पतालों के रक्तकोष में निगेटिव ग्रुप का ब्लड पूरी तरह खत्म होने की कगार पर पहुंचा गया है। जिला अस्पताल में एक भी यूनिट निगेटिव ग्रुप का ब्लड नहीं है। मेडिकल कॉलेज में सिर्फ इमरजेंसी के लिए दो यूनिट निगेटिव ग्रुप का ब्लड बचा है। यहां पर भी ए और एबी निगेटिव ग्रुप का ब्लड नहीं है।
इनको नि:शुल्क मिलता है ब्लड
शासनादेश के अनुसार थैलेसीमिया, एचआईवी, गर्भवती महिलाओं, कैदी, लावारिस, विकलांग, असाध्य रोगी, सिकिलसेल एनीमिया, डायलिसिस के रोगियों को ब्लड बैंकों से नि:शुल्क रक्त देने का नियम है। ऐसे में निगेटिव ब्लड ग्रुप वाले इन रोगियों को भी काफी दिक्कत हो रही है।
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मेडिकल कॉलेज में किस यूनिट का कितना ब्लड
ब्लड ग्रुप संख्या
ए पॉजिटिव 13
ए निगेटिव 0
बी पॉजिटिव 5
बी निगेटिव 1
ओ पॉजिटिव 42
ओ निगेटिव 1
एबी पॉजिटिव 12
एबी निगेटिव 0
जिला अस्पताल में किस यूनिट का कितना ब्लड
ब्लड ग्रुप संख्या
ए पॉजिटिव 16
ए निगेटिव 0
बी पॉजिटिव 27
बी निगेटिव 0
ओ पॉजिटिव 13
ओ निगेटिव 0
एबी पॉजिटिव 1
एबी निगेटिव 0
मेडिकल कॉलेज में सिर्फ दो ही यूनिट निगेटिव ग्रुप का ब्लड बचा हुआ है। ए और एबी निगेटिव ग्रुप का तो एक भी यूनिट ब्लड नहीं है। लोगों से अपील है कि रक्तदान जरूर करें। - डॉ. एमएल आर्या, ब्लड बैंक प्रभारी, मेडिकल कॉलेज।
अस्पताल में एक भी यूनिट निगेटिव ग्रुप का ब्लड नहीं है। रोजाना कई लोग ब्लड के लिए आते हैं। कई संस्थाओं, लोगों से बात करके रक्तदान करने की अपील की गई है। - डॉ. एमएस राजपूत, ब्लड बैंक प्रभारी, जिला अस्पताल।
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