झांसी। सरकारी अस्पतालों की ब्लड बैंकों में इन दिनों रक्त का जबरदस्त टोटा बना हुआ है। दूसरी तरफ डेंगू का भी सीजन चल रहा है। ऐसे समय में यदि डेंगू के केस आने शुरू हो गए तो प्लेटलेट्स कम होने वाले रोगियों के लिए समस्या खड़ी हो जाएगी, क्योंकि जब रक्त ही नहीं होगा तो प्लेटलेट्स कहां से बनेंगी।
कोरोना वायरस के दौर में रक्तदान शिविरों का आयोजन नहीं हो पा रहा है। वहीं, स्वयंसेवी संस्थाओं और नियमित रक्तदाताओं ने भी ब्लड डोनेट करने से हाथ पीछे कर लिए हैं। इसी का परिणाम है कि जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज के ब्लड बैंकों में रक्त का टोटा हो गया है। चूंकि, मानसूनी सीजन में डेंगू का मच्छर भी पनपता है। ऐसे में रक्तकोषों में ब्लड का होना तो बेहद जरूरी है। दरअसल, डेंगू होने पर कई मरीजों की प्लेटलेट्स गिर जाती हैं। इससे उनकी सेहत बिगड़ने लगती है। ऐसे में मरीजों को प्लेटलेट्स चढ़ानी की जरूरत पड़ती है। चूंकि, प्लेटलेट्स रक्त का ही तत्व है इसलिए बड़ा सवाल ये है कि रक्त ही नहीं होगा तो प्लेटलेट्स कैसे बनेंगी।
करें रक्तदान, बचाएं जान
अमर उजाला लोगों और स्वयंसेवी संस्थाओं से अपील करता है कि वह रक्तदान करने के लिए आगे आएं। सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए कुछ-कुछ लोग सरकारी अस्पताल पहुंचकर रक्तदान करें। आपका एक यूनिट रक्त चार लोगों की जान बचा सकता है।
ये है स्थिति
चिकित्सालय यूनिट
जिला अस्पताल 4
मेडिकल कॉलेज 12