झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में बिना रेमडेसिविर इंजेक्शन के भी कोरोना के 200 से ज्यादा गंभीर मरीजों को ठीक किया जा चुका है। डॉक्टरों के मुताबिक कोविड के इलाज में स्टेरॉयड काफी कारगर साबित हुआ है। ऐसे में जिनका ऑक्सीजन लेवल 80 प्रतिशत के नीचे और सीटी स्कोर 25 में से 20 से ज्यादा था, वो भी बिना रेमडेसिविर के सही हो गए।
मेडिकल कॉलेज के कोविड अस्पताल में 250 मरीज भर्ती हैं। इनमें ज्यादातर गंभीर मरीज ही होते हैं, जो कि कॉलेज में सीधे भर्ती होते हैं या फिर दूसरे अस्पतालों से रेफर कर दिए जाते हैं। इन दिनों कोविड के इलाज में रेमडेसिविर का काफी हो-हल्ला मचा हुआ है। जबकि, देश भर में इंजेक्शन का काफी टोटा है। वहीं, मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों की मानें तो रेमडेसिविर कोई रामबाण नहीं है। कोविड के इलाज में भी ये कारगर है भी या नहीं, इस पर भी अभी शोध चल रहा है। डब्ल्यूएचओ या फिर आईसीएमआर ने भी रेमडेसिविर के इस्तेेमाल करने को लेकर कोई दिशा-निर्देश नहीं दिए हैं। जैसे कि पिछले साल हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन को लेकर हो-हल्ला मचा हुआ था, वैसे ही इस बार रेमडेसिविर को लेकर है। डॉक्टरों के मुताबिक मेडिकल कॉलेज में बिना रेमडेसिविर इंजेक्शन के दो सौ से ज्यादा गंभीर मरीजों को ठीक किया जा चुका है, वो भी स्टेरॉयड की बदौलत। ऑक्सीजन लेवल 90 या इससे नीचे पहुंचने पर तुरंत ही स्टेरॉयड देना शुरू कर देते हैं। इसे लगभग एक सप्ताह तक चलाया जाता है। फिर जैसे ही मरीज की ऑक्सीजन हट जाती है, वैसे ही स्टेरॉयड बंद कर दी जाती है।
किन्हें दे सकते स्टेरॉयड
- ऑक्सीजन सेचुरेशन 90 प्रतिशत से कम हो।
- यदि ऑक्सीजन 94 से 90 प्रतिशत के बीच है और श्वसन दर 24 प्रति मिनट से ज्यादा है, ह्रदय गति सौ प्रति मिनट से अधिक हो, सीटी स्कोर 25 में 13 हो तब स्टेरॉयड दे सकते हैं।
इन्हें नहीं देना है
- गर्भवती महिला और स्तनपान करा रही हो।
- जिन मरीजों को लिवर, गुर्दे की बीमारी हो।
कोरोना के इलाज में रेमडेसिविर कारगर है या नहीं, इसके अभी तक कोई ठोस सबूत नहीं हैं। यह ट्रायल पर ही है। मेडिकल कॉलेज में बिना रेमडेसिविर के भी 200 से ज्यादा गंभीर मरीजों को स्टेरॉयड देकर ही ठीक किया जा चुका है। इनमें कई मरीजों का ऑक्सीजन लेवल 80 प्रतिशत से नीचे और सीटी स्कोर 20 से ज्यादा था। - डॉ. रामबाबू, मेडिसिन विभागाध्यक्ष एवं कोविड क्रिटिकल केयर इंजार्च, मेडिकल कॉलेज।