झांसी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के सभी चार पदों के लिए रविवार सुबह आठ बजे से एक साथ सभी ब्लॉकों में मतगणना शुरू हुई। कोविड-19 के प्रोटोकाल की कई पाबंदियों के चलते मतगणना की रफ़्तार बेहद सुस्त रही। आलम यह रहा कि सुबह आठ बजे से लेकर दोपहर दो बजे तक मतगणना कार्मिक मतपत्रों को छांटने का ही काम करते रहे। इस दौरान प्रत्याशियों की धड़कनें बढ़ती रहीं। वहीं देर रात तक 496 ग्राम पंचायतों मे से महज 55 ग्राम पंचायतों के परिणाम ही घोषित किए जा सके।
जिले के सभी ब्लॉक में सुबह आठ बजे भारी सुरक्षा बल की मौजूदगी में मतगणना शुरू हुई। भोजला मंडी में आरओ एवं उम्मीदवारों की उपस्थिति के बीच स्ट्रांग रूम की सील खोलकर मतपेटिकाएं निकाली गईं। मऊरानीपुर, बंगरा, चिरगांव, मोंठ, गुरसराय ब्लॉक में भी अभिकर्ताओं की मौजूदगी में स्ट्रांग रूम से मतपेटिकाएं निकाली गईं। इनसे मतपत्र निकाले जाने के बाद मतदान के दौरान दर्ज हुए मतपत्रों की संख्या से मिलान हुआ। इसके बाद विभिन्न पद वार मतपत्रों की छंटाई का काम आरंभ हुआ।
इस बार सभी चारों पदों के एक साथ चुनाव कराए जाने से एक ही मतपेटिका में सभी पदों के मत डाले गए थे। इस वजह से छंटाई में काफी अधिक समय लगा। इस काम को पूरा करने में ही करीब छह घंटे से अधिक का समय लग गया। काफी धीमी रफ्तार की वजह से पहला परिणाम करीब दो बजे मोंठ ब्लॉक के आठ ग्राम पंचायत सदस्यों का आया। इसके बाद पांच बजे तक सिर्फ 11 ग्र्राम प्रधान के पदों की ही गिनती पूरी हो सकी थी।
मतों की गणना के लिए पूरे जनपद में कुल 315 टेबिल लगाई गई थी। इनमें बबीना ब्लॉक के लिए 42, बड़ागांव के लिए 36, चिरगांव के लिए 41, मोंठ के लिए 44, गुरसराय के लिए 36, बंगरा के लिए 34, मऊरानीपुर के लिए 46 एवं बामौर ब्लॉक के लिए 36 टेबिल लगाई र्गईं थीं।
दोपहर बाद तेज कराई प्रधान पदों के मतों की गिनती
मतगणना स्थल पर परिणाम जानने के लिए समर्थकों की भीड़ जमा होने शुरू हो गई। शुरूआत में ग्राम पंचायत सदस्य के मतों की गिनती शुरू की जानी थी लेकिन, बाहर समर्थकों की भारी भीड़ को देखते हुए दोपहर तीन बजे के बाद ग्राम प्रधान पद के मतों की गिनती तेज कराई गई। शाम तक विभिन्न ब्लॉकों में सिर्फ एक दर्जन पंचायत के पदों की गिनती ही पूरी हो सकी।
कोरोना के चलते खौफ में दिखे कर्मचारी
झांसी। कोरोना संक्रमण की बढ़ती रफ्तार को लेकर मतगणना कर्मियों में खौफ साफ तौर पर नजर आ रहा था। कोविड-19 प्रोटोकाल को देखते हुए अंदर एवं बाहर की तरफ बेरीकेडिंग लगाई गई थी, लेकिन मतगणनाकर्मियों ने दूसरे के संपर्क में आने से बचने के लिए अंदर की तरफ से वहां कुर्सियां खड़ी कर दी थीं। अपनी सुरक्षा के लिए मतगणनाकर्मी हाथों में ग्लव्स के साथ फेस शील्ड के साथ नजर आए। हालांकि बाद में काम के बढ़ते दबाव की वजह से कई कर्मचारियों ने फेस शील्ड उतारकर दोहरे मास्क लगाकर काम किया। कर्मचारियों के भीतर चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर भी काफी अंसतोष दिखाई पड़ा। कई जिम्मेदार अधिकारियों ने भी ऐसे माहौल में मतगणना कराए जाने को गलत बताया।