संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। स्वयं सहायता समूह से जुड़ीं महिलाएं हर क्षेत्र में अपना योगदान दे रही हैं। एक ओर अपने परिवार को संभाल रही हैं तो दूसरी ओर घर से बाहर निकलकर बिजली बिल जमाकर कमाऊ बन गई हैं। जनपद में 144 विद्युत सखियां हैं। एक सखी हर महीने करीब आठ हजार से 25 हजार रुपये तक कमा रही हैं। इस कमाई से वह अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दिला रही हैं।
आज गांव की भी महिलाएं परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में जुटी हुई हैं। जनपद में संचालित स्वयं सहायता समूह की कई महिलाएं गांव में घर-घर जाकर बिजली बिल जमा कर रही हैं। उपायुक्त स्वत: रोजगार बीआर आंबेड ने बताया कि जनपद के गांवों में ऐसी 144 महिलाएं हैं, जो महीने भर बिजली का बिल कलेक्शन करती हैं। इन्हें बिल के हिसाब से कमीशन दिया जाता है। इस हिसाब से एक बिजली सखी को न्यूनतम आठ हजार और अधिकतम 25 हजार तक का फायदा होता है।
62 कोटेदार बनकर बांट रहीं राशन
गांव में कई कोटेदारों ने सरकारी राशन की दुकान से किनारा कर लिया है। ऐसी कोटे की दुकानों को राशन सखी के सुपुर्द कर उन्हें गांव में सरकारी राशन बांटने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। ऐसी समूह की 62 महिलाएं हैं, जो सरकारी राशन की दुकानें चला रही हैं। इतना ही नहीं, जहां-जहां सखियां राशन की दुकान चला रही हैं, उस क्षेत्र से राशन संबंधी एक भी शिकायत प्राप्त नहीं हो रही है। इसमें सखियों को प्रतिदिन के हिसाब से कमीशन दिया जाता है।
प्रत्येक ग्रामीण को सरकारी योजना का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उन्हें कोटे की दुकान से मिलने वाला अनाज बांटती हूं। इस कार्य से जो भी कमीशन मिलता है, उससे परिवार को आर्थिक रूप से सहयोग करती हूं। - हेमा अहिरवार, सिमरावारी
पावर हाऊस पर बिजली बिल के कलेक्शन का काम करती हूं। समय मिलने पर घर-घर जाकर भी कलेक्शन करती हूं। महीने में अच्छा खासा कमीशन मिल जाता है। उससे हमारा परिवार आर्थिक रूप से पहले से काफी सुधर आया है। - शीला, सिमरावारी