झांसी। पत्नी की हत्या के आरोपी भवानी सिंह परिहार का लॉकडाउन के दरम्यान रोजगार चला गया था, जिससे वो परेशान रहने लगा था। यहां तक कि उसने परिवार के लोगों से भी दूरी बना ली थी और घर के पास ही अलग एक कमरे में रहने लगा था। पति-पत्नी के बीच आपसी विवाद भी रोज की बात हो गई थी। बृहस्पतिवार को यही विवाद हत्या के अंजाम तक पहुंच गया।
दतिया गेट बाहर पटला मुहल्ला निवासी भवानी सिंह परिहार के एक बेटी व तीन बेटे हैं। बेटी क्रांति और बेटे पुष्पेंद्र व सोनू की शादी हो चुकी है। बड़ा बेटा पुष्पेंद्र और दूसरा सोनू रेलवे स्टेशन पर वेंडर हैं। छोटा बेटा अंकित एक चिकित्सक के क्लीनिक पर काम करता है। जबकि, भवानी सिंह परिहार शुरुआत से ही ऑटो चलाने का काम करता था। एक साल पहले उसने एक कंपनी से ऑटो फाइनेंस कराया था, जिसकी उसे मासिक किस्त अदा करनी पड़ती थी। लेकिन लॉकडाउन के दरम्यान ऑटो के पहिये थम गए थे, जिससे वो किस्त अदा नहीं कर पाया। इस पर दो महीने कंपनी ने उससे ऑटो वापस ले लिया। पुत्रों से पैसे मांगने में संकोच होता था, क्योंकि उनकी भी अपनी गृहस्थी थी। तनाव में वो घर के पीछे मुहल्ले में ही एक अलग कमरे में रहने लगा था। परिजनों व अन्य लोगों से उसने बातचीत भी लगभग बंद कर दी थी। तंगहाली के दौर में पत्नी से भी आए दिन झगड़ा होने लगा था। हालांकि, कमरे की साफ-सफाई करने और भवानी को खाने देने पत्नी सिया देवी रोजाना उसके कमरे पर जाती थी। बृहस्पतिवार को भी सुबह पत्नी कमरे की सफाई करने गई थी। इसी दरम्यान दोनों के बीच कहासुनी हो गई। गुस्से में भवानी ने पत्नी के सिर पर ईंट से प्रहार कर दिया, जिससे वो लहूलुहान होकर गिर गई। पत्नी को पड़ा छोड़कर भवानी कमरे का बाहर से ताला लगाकर चला गया, जिसे बाद में उसके पुत्र पुष्पेंद्र ने दूसरी चाबी के जरिये खोला। घटना को अंजाम देने के बाद भवानी को समझ नहीं आया कि वो क्या करे, ऐसे में वो सीधे पुलिस ऑफिस पहुंच गया। यहां से उसे कोतवाली पुलिस के हवाले कर दिया गया।
भक्ति में लगाने लगा था मन
झांसी। रोजगार छिन जाने से तंगहाली से परेशान भवानी सिंह परिहार अपना ज्यादातर समय भक्ति में व्यतीत करता था। वो घर के पीछे बने मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना करता था। यहां तक कि वो परिजनों से दूर मंदिर के पास ही बने मकान के ऊपरी कमरे में रहने लगा था। पिछले कई महीनों से उसकी दिनचर्या मंदिर और कमरे के बीच सिमट कर रह गई थी।
घटना का किसी को नहीं था अंदेशा
झांसी। भवानी सिंह ऐसा कदम उठा सकता है, इसका किसी को जरा भी अंदेशा नहीं था। लेकिन, घटना सामने आने के बाद सब भौंचक्के रह गए। मुहल्ले वाले भी सकते में आ गए। देखते ही देखते घटना स्थल पर भारी भीड़ जमा हो गई। इस दौरान मृतका की बेटी व अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल रहा। सभी उन्हें ढांढस बंधाते रहे।