अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। आरएसएस के विद्यार्थी कार्य विभाग की साहसिक यात्रा के बाद उनाव स्थित सूर्य मंदिर में लगी शाखा में रविवार को सह प्रांत प्रचारक मुनीष ने छत्रपति शिवाजी महाराज के जीवन का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके सुझाए गोरिल्ला युद्ध कला में आज भी हमारी सेना पारंगत है। मनुष्य अपने साहस और सूझबूझ के बल पर ही अनेक चुनौतियों का सामना करते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करता है।
सह प्रांत प्रचारक ने बताया कि लुप्त होती सनातन संस्कृति को जीवंत कर अपने बचपन से ही निडर और साहसी छत्रपति शिवाजी महाराज में चतुराई भी कूट-कूटकर भरी थी। गोरिल्ला युद्ध कला उनमें से एक थी। इसलिए हमें साहस के साथ चतुराई को भी भूलना नहीं है। कहा कि एवरेस्ट पर पहुंचने वाली पहली दिव्यांग महिला अरुणिमा सिन्हा थीं। उनके साहस के आगे दुनिया नतमस्तक हुई।
इससे पहले, स्वयंसेवक साइकिल चलाकर रानी लक्ष्मीबाई के किले से उनाव स्थित सूर्य मंदिर के दर्शन के लिए निकले। वहां पहुंचकर शाखा लगाई। कार्यक्रम में सह विभाग कार्यवाह शशिकांत, महानगर कार्यवाह मुकुल, योगेश पांचाल, महानगर प्रचारक सक्षम, सत्या चौधरी, सौरभ, दिनेश, जितेंद्र मिश्र, अजय तिवारी, अभय, सूर्यकुमार, वयम मौजूद रहे।