‘अपराजिता: 100 मिलियन स्माइल्स’ के तहत ‘जाति-धर्म से ऊपर इंसानियत’ विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई, जिसमें विद्यार्थियों ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा धर्म इंसानियत है। सभी को अपना ये धर्म निभाना चाहिए। इस दौरान नारी गरिमा को अक्षुण्ण बनाए रखने की शपथ भी ली गई।
शनिवार को शारद हिल्स कॉलोनी स्थित कांसेप्ट क्लासेस में आयोजित कार्यक्रम में अभिजीत डे ने कहा कि हाल ही में एक विधायक की बेटी के दूसरी जाति के युवक से शादी करने का मामला सामने आया है। इस विवाह का तमाम लोग जातिगत आधार पर विरोध कर रहे हैं। जबकि, आज जाति-धर्म के बंधन बौने हो गए हैं। ऐसे में इंसानियत को ही हमें सबसे बड़ा धर्म मानना होगा।
महेंद्र ठाकुर ने कहा कि जाति धर्म की बंदिशें अनुशासन की सीमा तक तो ठीक हैं, लेकिन ये किसी को अपने जीवन के फैसले लेने से नहीं रोक सकती हैं। हर्षिका सिंह ने कहा कि जाति का बंधन अब टूटना चाहिए। सदियों पुरानी ये परंपरा आज के दौर से कदमताल नहीं कर पा रही है। सभी को मिलकर इसे बदलना चाहिए।
छात्रा गुनगुन ने कहा कि संविधान ने किसी के साथ भेदभाव नहीं किया है। सभी को एक समान अधिकार दिए गए हैं। फिर हम संविधान के विपरीत कैसे जा सकते हैं। देश के कानून को हमें सर्वोपरि रखना होगा। इस दौरान साक्षी सिंह, मानसी शिवहरे, आस्था सिंह आदि समेत संस्थान के अन्य विद्यार्थियों ने भी अपने विचार रखे। सभी ने जाति और धर्म से ऊपर इंसानियत को बताया।
जिस प्रकार सभी पहियों के चलने से गाड़ी आगे बढ़ती है, उसी प्रकार देश के प्रत्येक नागरिक के समान भाव से आगे बढ़ने से देश आगे बढ़ेगा। इसके लिए जाति-धर्म के बंधन से ऊपर उठकर सोचना होगा -
नियती शिवहरे
जातियों के जंजाल में फंसकर देश पहले से बहुत कुछ खो चुका है। इतिहास गवाह है कि बाहरी आक्रांताओं ने हमेशा हमारी इस कमजोरी को अपनी ताकत बनाया। लेकिन, अब हमें इस जंजाल से बाहर आना होगा -
ईशा साहू
जाति और धर्म के बंधन हमें रहने का सलीका सिखाते हैं। हर धर्म में इंसानियत को ही सबसे ऊपर रखा जाता है। ऐसे में हमें भी अपनी सोच ऊंची रखते हुए युवाओं को अपने फैसले लेने की छूट देनी होगी -
तनिशा
देश के कानून ने सभी को समान अधिकार दे रखे हैं। अगड़ी, पिछड़ी का कोई भेद नहीं रखा गया है। ऐसे में हमें भी ये भेद खत्म करना होगा। समाज और देश के विकास के लिए ये जरूरी है-
महक