ललितपुर। बेटे की फर्म से दवाओं समेत लाखों के सामान की खरीद करने के आरोपों में एसीएमओ घिर गए हैं। उन पर नियमों को ताक पर रखकर काम करने का आरोप है। प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के निदेशक को जांच का जिम्मा सौंपा है।
अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. मुकेश चंद्र दुबे एसीएमओ भंडार रहे हैं। इसके अलावा कार्यवाहक सीएमओ का भी जिम्मा संभाला है। चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव ने पत्र जारी कर कहा कि एसीएमओ भंडार रहते हुए सामग्री का क्रय अपने पुत्र की फर्म से करने, कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधिकारी रहते हुए गाइडलाइन के विपरीत साढ़े तीन लाख की ग्लूको स्ट्रिप अनाधिकृत रूप से खरीदने, धनराशि का अपव्यय व दुरुपयोग करने के मामले में प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए हैं। साथ ही डीएम के निर्देश पर मामले की प्रारंभिक जांच कर रहे जांच अधिकारी डीडीओ को पीएचसी, सीएचसी के लिए आवंटिज बजट के अनुसार ग्लूको स्ट्रिप खरीदने से संबंधित अभिलेख, पत्रावली और जिला स्वास्थ्य समिति के अनुमोदन प्राप्त करने संबंधी पत्रावली उपलब्ध न कराने के मामले में भी प्रथम दृष्टया दोषी मिले हैं। इस वजह से उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक के अंतर्गत विभागीय अनुशासनिक कार्यवाही की संस्तुति की गई है। प्रमुख सचिव ने मामले की जांच के लिए निदेशक स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय को नामित किया गया है।
दो लिपिक भी किए जा चुके निलंबित
स्वास्थ्य विभाग में कुछ सालों में अफसरों और लिपिकों द्वारा किए गए भ्रष्टाचार के मामलों की एक के बाद एक परतें खुलती जा रही हैं। तत्कालीन सीएमओ पर एनसीडी सेल में की गई खरीददारी के मामले में जांच चल रही है। इसके अलावा एसीएमओ व कई लिपिकों के खिलाफ भी अवैैध तरीके से की गई मेडिकल सामग्री की खरीद की जांच की जा रही है। कुछ समय पहले दो लिपिकों को जांच के बाद निलंबित किया जा चुका है।
शासन स्तर से एसीएमओ के खिलाफ लगे आरोप की जांच निदेशक स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय करेंगे। इससे पहले डीएम स्तर से जांच कराई जा चुकी है। - डॉ. जीपी शुक्ला, सीएमओ।