झांसी। ललितपुर स्थित राजघाट बांध से छोड़े गए पानी के कारण माताटीला बांध के सभी गेट खोल दिए गए हैं। तीन लाख क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है। बेतवा नदी में पानी बढ़ने से निकटवर्ती गांवों में अलर्ट घोषित कर दिया गया है। हालांकि, शुक्रवार को गेट बंद होने की उम्मीद है। वहीं, बांध के गेट खुलने से मनोरम दृश्य देखने को मिल रहा है।
मध्य प्रदेश में हो रही झमाझम बारिश का फायदा ललितपुर स्थित राजघाट को हुआ है। राजघाट बांध पानी से लबालब भर गया है। बांध के पूर्ण जलस्तर 370.90 के सापेक्ष 369.65 मीटर पर पानी पहुंच गया है। पानी पूर्ण जलस्तर को पार न कर जाए, इस कारण बुधवार को पहले एक लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, इसके बाद इसकी मात्रा बढ़ाकर तीन लाख उन्नीस हजार क्यूसेक तक कर दी गई।
उधर, नदी में पानी छोड़े जाने से माताटीला बांध का जल स्तर बढ़कर 1009 फीट हो गया। माताटीला बांध का पूर्ण जलस्तर 1012 फीट है। सिंचाई विभाग के अफसर इस समय माताटीला बांध का जलस्तर 1008 फीट तक रखना चाहते हैं। इस कारण बुधवार की रात तीन बजे से बांध के सभी तेइस गेट चार फीट पर खोल दिए गए। इनमें तीन गेट आंशिक खोले गए हैँ। सुबह छह बजे से तीन लाख क्यूसेक पानी बेतवा नदी में छोड़ा जा रहा है। माताटीला बांध से पानी छोड़े जाने से सुकुवां ढुकुवां व खपरार बांध का जलस्तर भी बढ़ गया है। मानसून अभी सक्रिय है, जिससे आगामी दिनों में बारिश की संभावना को देखते हुए जलस्तर और बढ़ने के आसार हैं।
इन बांधों का बढ़ा जल स्तर
ढुकुवां बांध का जलस्तर 273.10 मीटर, पारीछा बांध का 193.94 मीटर, सपरार बांध का 220.94 मीटर, पहाड़ी बांध का 196.13 मीटर, पहूंज बांध का 230.79 मीटर, डोंगरी बांध का 269.40 मीटर, पथरई बांध का 201.00 मीटर व खपरार बांध का 271.50 मीटर तक बढ़ गया है। ढुकुवां बांध में अभी 0.61 मीटर, पारीछा बांध में 0.71 मीटर, सपरार में 3.75 मीटर, पहाड़ी में 0.00, लहचूरा में 0.00 मीटर, पहूंज में 4.70 मीटर, डोंगरी में 2.80 मीटर, पथरई में 2.80 मीटर व खपरार में 1.50 मीटर पानी की कमी है। वर्तमान में राजघाट बांध , माताटीला बांध , ढुकुवां बांध , पारीछा बांध , पहाड़ी बांध, लहचूरा बांध से पानी छोड़ा जा रहा है। सिंचाई विभाग चतुर्थ मंडल के प्रभारी अधीक्षण अभियंता एन के सक्सेना ने बताया कि माताटीला बांध का पानी 1008 फीट तक रखा जाएगा। शुक्रवार तक स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है।
नहीं बन पा रही है बिजली
माताटीला बांध में दस- दस मेगावाट की तीन जल विद्युत उत्पादन इकाइयां स्थापित हैं। जल विद्युत इकाइयों की इनकमिंग ग्रिड फेल होने के कारण बांध से पानी छोड़े जाने के बाद भी बिजली उत्पादन नहीं हो पा रहा है।
झांसी में बारिश का आंकड़ा 287 मिमी पर पहुंचा
झांसी। इस बार बुंदेलखंड में पिछले साल की तुलना में कम बारिश हुई है।
सिंचाई विभाग के आंकड़ों के अनुसार झांसी में अब तक 287 मिली मीटर, ललितपुर में 380 मिली मीटर, जालौन में 199 मिली मीटर, बांदा में 255 मिली मीटर, हमीरपुर में 252 मिली मीटर, महोबा में 204 मिली व चित्रकूट में 304 मीटर बरसात हो चुकी है। छह अगस्त से सात अगस्त की सुबह छह बजे तक झांसी जनपद में 15 मिली मीटर वर्षा दर्ज की गई, जबकि बांदा में 17 मिली मीटर, जालौन में शून्य, हमीरपुर में पांच मिली मीटर, ललितपुर में 50 मिली मीटर व महोबा में सात मिली मीटर वर्षा हुई।
सुकुवां ढुकुवां बांध के रिपटे पर आया पानी
तालबेहट (ललितपुर)। तीन दिन से हो रही मूसलाधार बारिश के कारण माताटीला से पानी छोडेे़ जाने से वहां का दृश्य मनोरम हो गया है। बांध से पानी छोड़ने की जानकारी होने पर काफी संख्या में आसपास के लोग वहां पहुंच गए। अवर अभियंता जी के मौर्या ने बताया कि बांध के बीस गेटाें को बारह फीट, दो गेटों को चार फीट तथा एक गेट को मात्र आठ फीट खोला गया है।
वही सुकुवां ढुकुवां बांध से पानी का निकलना प्रारम्भ हो गया है। रिपटे पर पानी आ गया, जिससे कई गांव के लोगों की आवाजाही बंद हो गई हैै। बांध के पानी के बहाव में आने से कुछ पशुपालकों की भैंसें बह गई हैं।
बेतवा उफनाई, सिंहपुरा व लोटना गांव बने टापू
प्रशासन ने नदी किनारे की दुकानें खाली करवाईं, होटलों से पर्यटकों को हटाया
ओरछा। मध्यप्रदेश के भोपाल क्षेत्र में तीन दिन से हो रही तेज बारिश के कारण बेतवा नदी पर बंधे बांधों का जल स्तर बढ़ गया। इस कारण माताटीला बांध से तीन लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने से बेतवा नदी उफना गई है। रिपटे पर पानी आ जाने के कारण झांसी-टीकमगढ़ मार्ग अवरुद्ध हो गया है।
बेतवा नदी में तेजी के साथ बढ़े पानी को देखते हुए बृहस्पतिवार को प्रशासन ने अलर्ट जारी कर नदी के किनारे की सभी दुकानों को खाली करवा दिया है। आसपास स्थित होटलों में भी पानी आने के खतरे को देखते हुए पर्यटकों को इन होटलों से हटा दिया गया है। उधर बेतवा व जामनी नदी के दोआब में बसे सिंहपुरा व लोटना गांवों के दोनों ओर रपटों पर पानी आ जाने से यह गांव टापू में तब्दील हो गए हैं। प्रशासन का दावा है कि बाढ़ से पहले ही इन गांवों में रसद पहुंचा दी गयी थी, पर वहां के निवासी दूरभाष पर इसके उलट स्थिति बता रहे हैं। नदी के आसपास पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।