झांसी। अगर जनवरी से मई तक की बात की जाए तो झांसी जनपद में 769 जगह आग लग चुकी है। इससे करीब 10 करोड़ का नुकसान माना जा रहा है। डेढ़ सौ किसानों की गेहूं की फसल आग से जल चुकी है। आग लगने की सर्वाधिक घटनाएं झांसी महानगर में हुईं हैं। आग लगने की वजह झूलते तार और शॉट सर्किट बताया जा रहा है। हालांकि आग लगने की घटनाएं तो और भी हुई होंगी लेकिन यह आंकड़ा फायर ब्रिगेड का है।
गेहूं के खेत, कारखाने, घर और गोदामों में आग लगने की घटनाएं सबसे ज्यादा हुईं हैं। कई स्थान तो ऐसे हैं कि वहां तंग गलियों के कारण फायर ब्रिगेड पहुंच ही नहीं पाई थी। दूर से किसी तरह आग बुझाने की कोशिश की गई। पिछले दिनों ही शहर में एक गोदाम में आग लग गई थी। आग की लपटें दूर दूर तक दिखाई दे रही थीं। झांसी के बाद आग लगने की सबसे ज्यादा घटनाएं मोंठ क्षेत्र में हुईं हैं। यहां जनवरी से मई तक 128 स्थानों पर लगी आग को दमकल कर्मियों ने बुझाया है। इसके बाद गरौठी में आग लगने की 98 घटनाएं सामने आईं हैं। चीफ फायर आफिसर केके ओझा ने बताया कि गर्मियों में आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती हैं।
स्थान आग लगने की घटनाएं
झांसी महानगर 461
मोंठ 128
मऊरानीपुर 82
गरौठा 98
मुआवजे के लिए कई वर्षों से भटक रहे हैं लोग
झांसी। बिजली के तार टूटने या झूलते तारों से स्पार्किंग से सबसे ज्यादा आग खेतों में लगती है। कई साल पहले जिन किसानों के खेतों में आग लगी थी उन्हें भी अभी तक मुआवजा नहीं मिल सका है। बिजली विभाग के अफसरों का कहना है कि पहले सर्वे कराया जाता है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर बिजली अफसरों की कमेटी स्थलीय निरीक्षण करती है उसके बाद मुआवजा तय किया जाता है।