झांसी। कोरोना की पहली लहर में महामारी की चपेट में आने के बाद मौत के मुंह से निकले 50 फीसदी लोगों ने जिंदगी जीने का तरीका बदल लिया है। इनमें से कई लोग सुबह उठकर टहलने, व्यायाम करने लगे हैं। फास्ट फूड से तौबा कर ली है। इसके अलावा तंबाकू से लेकर शराब तक छोड़ दी है। मेडिकल कॉलेज की तरफ से किए गए सर्वे में ये बात सामने आई है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के क्वालिटी ऑफ लाइफ इंडेक्स का इस्तेमाल करते हुए मेडिकल कॉलेज ने सर्वे किया। सर्वे के दौरान पहली लहर में मेडिकल कॉलेज में भर्ती हुए 300 गंभीर लोगों पर अध्ययन हुआ। पड़ताल के दौरान सामने आया कि इनमें से अधिकांश लोग कोविड से पहले आराम देय जिंदगी जीते थे। ज्यादातर लोग न तो व्यायाम करते थे और न ही पौष्टिक खाना खाते थे। इसके अलावा बीपी, डायबिटीज, हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों से ग्रसित लोग इन्हें हल्के में लेते थे। मगर कोरोना होने के दौरान इनकी स्थिति गंभीर हो गई। ऑक्सीजन सपोर्ट पर कई दिनों तक रहना पड़ा तो फिर ठीक होने के बाद 150 लोगों ने अपनी दिनचर्या को बदल दी है। सर्वे करने वाली टीम के मुताबिक अंकुरित चने से लेकर पौष्टिक खाना शुरू कर दिया है, जिसमें विटामिन, मिनिरल्स होते हैं। जंक फूड छोड़ दिया है, जो कि मोटापा, जल्दी थकान और विभिन्न बीमारियां का कारण बनता है। बातचीत के दौरान लोगों ने बताया कि वह पहले से ज्यादा स्वस्थ महसूस कर रहे हैं।
मधुमेह नियंत्रित हुआ, हाइपरटेंशन से छुटकारा
पड़ताल के दौरान कई मरीजों का मधुमेह नियंत्रित हो गया है, जो कि कोरोना होने से पहले अनियंत्रित रहता था। टीम इसके पीछे की वजह व्यायाम आदि को मानकर चल रही है। वहीं, तंबाकू, शराब छोड़ने से कई मरीजों के हाइपरटेंशन दूर होने की बात सामने आई है।
सर्वे के दौरान सामने आया कि 50 फीसदी रोगियों ने कोविड से गंभीर होने के बाद जिंदगी जीने का तरीका बदला है। फास्ट फूड, शराब, तंबाकू छोड़ दी है। सुबह की सैर, व्यायाम शुरू कर दिया है। कई मरीजों की मधुमेह नियंत्रित हुई है। जबकि, हाइपरटेंशन से छुटकारा मिला है। - डॉ. अंशुल जैन, उप प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज।