दाने, खुजली से बच्चे और दर्द, सूजन से महिलाएं परेशान
- सर्दियों में हर उम्र के लोग त्वचा रोग से पीड़ित, 40 फीसदी रोगी बढ़े
- एटॉपिक डरमिटाइटिस से लेकर चिल ब्लेंस तक बना रहा है शिकार
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
सर्दियों में हर उम्र के लोग त्वचा रोगों से पीड़ित हैं। एटॉपिक डरमिटाइटिस बीमारी होने से बच्चे जहां दाने व खुजली से परेशान हैं, वहीं चिल ब्लेंस का शिकार महिलाएं हो रही हैं। इसके अलावा एग्जाइमा, सोरायसिस भी लोगों को हो रही है। ऐसा ठंडी हवा चलने के कारण त्वचा शुष्क होने से सूखापन बढ़ने के कारण हो रहा है। मौजूदा समय में त्वचा रोगियों की संख्या में चालीस फीसदी का इजाफा हो गया है।
ठंडी हवाओं के अलावा शरीर में अपर्याप्त नमी, हानिकारक पराबैंगनी सूरज की किरणें, अत्यधिक गर्म पानी से स्नान आदि भी त्वचा को रूखा करते हैं। त्वचा पर साबुन का प्रयोग भी ध्यानपूर्वक करना चाहिए क्योंकि साबुन त्वचा को शुष्क बना देता है। त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक शिवहरे ने बताया कि ठंड में एग्जाइमा (छाजन) बीमारी होना भी आम बात है। त्वचा संबंधी इस बीमारी के होने से बहुत तेज खुजली होती है। इससे त्वचा मोटी होने लगती है, जो आगे चलकर पक जाती है। यह बीमारी एड़ी के आगे और घुटने के नीचे से पंजों के बीच होती है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों की त्वचा में नमी कम होती है, उन्हें सोरायसिस बीमारी भी हो जाती है। इस बीमारी से शरीर में लाल रंग के चकत्ते पड़ जाते हैं। सफेद रंग की पपड़ी निकलने लगती है। ये बीमारी सालों तक चलती है। ठंड बढ़ने से यह अगर जोड़ों तक फैल जाए तो सोरायसिस अर्थराइटिस भी हो जाता है, जो बहुत दर्दनाक होता है। ऐसे में शरीर को गर्म रखना चाहिए। उन्होंने बताया कि इन दिनों चालीस फीसदी त्वचा रोगी बढ़ गए हैं।
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कपड़ों का भी ध्यान रखें
लोग जो कपड़े पहनते हैं, उसका सीधा असर त्वचा पर पड़ता है। ठंड में बाजार में सिंथेटिक, नायलॉन और पॉलीएस्टर के बने जैकेट अधिक मिलते हैं, जिनको पहनने पर ठंड तो दूर हो जाती है लेकिन इसमें मौजूद केमिकल सोरायसिस को बदतर बना देता है। ऐसे में कॉटन के कपड़ों का चुनाव करें, आप कॉटन के कई कपड़ों को एक साथ पहन सकते हैं।
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दस में आठ बच्चे पीड़ित
इन दिनों हर दस में आठ बच्चे एटॉपिक डरमिटाइटिस से पीड़ित हैं। बच्चों में ऑयल सिंथेसिस देर से शुरू होते हैं। वहीं, धूप कम लेने से विटामिन-डी की कमी हो जाती है। इस कारण सर्दियों में बच्चों को दाने और खुजली होने लगती है। ऐसे बच्चों के लिए सख्त के बजाए मुलायम साबुन इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं, 55-60 की उम्र में बुजुर्गों में भी ऑयल सिंथेसिस बनना बंद हो जाता है। इससे त्वचा में चिकनाहट नहीं रहती है।
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चिल ब्लेंस से बचें महिलाएं
सर्दियों में खून का संचालन कम हो जाने से वयस्कों को चिल ब्लेंस नामक बीमारी हो रही है। डॉ. प्रतीक ने बताया कि ये बीमारी होने से हाथ-पैर की उंगलियों की त्वचा में छेद होने लगते हैं। इससे सूजन, तेज जलन, दर्द होने लगता है। एक बार होने पर हर साल होता है। यह बीमारी महिलाओं में ज्यादा होती है, क्योंकि वह सुबह से ही ठंडे पानी में काम करने लगती हैं। इसलिए महिलाओं को गर्म पानी में काम करना चाहिए। मोजे पहने रहना चाहिए। थोड़ी-थोड़ी देर में ब्लोअर के सामने भी बैठना चाहिए।
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ये हैं घरेलू नुस्खे
- सूखी त्वचा पर नारियल तेल लगाएं
- धूप में भी कुछ देर बैठें
- घर में ब्लोअर से शरीर को गर्माहट दें
- पैर में मोजे जरूर पहनें