‘अग्निपथ’ से बाहर आया क्रांतिपथ
सरकार ने दो साल बाद फिर मांगा एस्टीमेट
205 करोड़ रुपये से बढ़कर 231 करोड़ रुपये का हुआ प्रोजेक्ट
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी।
महारानी लक्ष्मीबाई के क्रांतिपथ की सुध आखिर आ गई है। दो साल से एक टेबल से दूसरी टेबल पर घूम रही इस फाइल को फिर से तैयार करने के लिए कहा गया है। आवास विकास परिषद ने इसके लिए 231 करोड़ रुपये का एस्टीमेट तैयार किया है। दो साल पहले ये 205 करोड़ का था। एस्टीमेट बनने का कारण जीएसटी और लेवर सेस फंड बताया गया है। अब पर्यटन विभाग इसे केंद्र सरकार के पास भेजेगा।
देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की नायिका वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई के युद्ध कौशल और उनसे जुडे़ स्थलोें क ो लोग जान सके, इसके लिए 2014 में क्षेत्रीय सांसद व केंद्रीय मंत्री उमा भारती की पहल पर राज्य पुरातत्व विभाग, आवास विकास परिषद और पर्यटन विभाग ने क्रांतिपथ प्रोजेक्ट तैयार किया था। पुरातत्व विभाग की गोष्ठियों में विद्वानों ने उन स्थलों को चिह्नित कराया था, जहां रानी ने झांसी नगर से निकलने बाद युद्ध लड़ा और रणनीतियां बनाई। नवंबर 2014 में 205 करोड़ का यह प्रोजेक्ट केंद्र सरकार को भेज दिया गया। लेकिन इसके बाद प्रोजेक्ट पर कोई कदम नहीं उठा।
हालांकि देश में सेवा एवं वस्तुकर (जीएसटी) लागू होने के बाद केंद्र ने नए एस्टीमेट के साथ प्रोजेक्ट को दोबारा भेजने के निर्देश दिए थे। इसके बाद जीएसटी 12 प्रतिशत और लेबर सेस फंड 1 प्रतिशत लगने पर यह 231 करोड़ रुपये का हो गया। क्षेत्रीय पर्यटन अधिकारी डा. कल्याण सिंह यादव ने बताया कि संभावना है कि 2018 के शुरूआती महीनों में यह प्रोजेक्ट पास हो जाएगा। इसके साथ ही रानी झांसी के स्थलों से जुडे़ विकास कार्य प्रारंभ हो जाएगा।
रानी से जुडे़ इन स्थलों का होगा विकास
रानी लक्ष्मीबाई के क्रांति पथ प्रोजेक्ट में पुरातत्व विभाग ने झांसी, जालौन, दतिया, भिंड, ग्वालियर के वह स्थल चिह्नित किए थे, जहां रानी रूकी थी, युद्ध किया था और युद्ध की रणनीतियां बनाई। इनमें झांसी का किला, रानी महल, भांडेरी गेट, लोहागढ़ की गढ़ी, कोंच का राम मंदिर, कालपी का मंत्रणा कक्ष, चुर्खी में दामोदर राव की मौसी का घर, गोपालपुरा की गढ़ी, टारौली-बारोली की गढ़ियां, कालपी, लश्कर आदि स्थल है। यहां पर्यटक सुविधा से आ-जा सके, इसके लिए संपर्क मार्ग, टायलेट, शौचालय लाइटिंग, बैठने की जगह, स्थल का वर्णन करता सूचना बोर्ड आदि का कार्य होगा। प्रोजेक्ट में ललितपुर का बानपुर, तालबेहट का किला भी शामिल है।