नये साल के लिए जिले को 23 लाख 50 हजार पौधे रोपित करने का लक्ष्य मिला है। इनमें वन विभाग 14 लाख 18 हजार पौधे लगाएगा। यह पौधे जुलाई - अगस्त में लगेंगे। विभाग का वन्य क्षेत्र बरसाती पानी पर निर्भर होने से उसे कम पानी में लगने वाले बांस, शीशम, सागौन, बबूल आदि पौधों को लगाना पडे़गा।
कई बार सूखा झेल चुके बुंदेलखंड के झांसी जिले में वन विभाग का 33422 हेक्टेयर वन्य क्षेत्र है यह क्षेत्र बरसात के पानी पर निर्भर है। सिंचाई सुविधाओं का भी बेहद अभाव है। इसके बावजूद हर साल लाखों की संख्या में शासन के निर्देश पर पौधे रोपित किये जाते हैं। वर्ष 2018 में भी जुलाई - अगस्त के दौरान 783200 पौधे लगाये गये थे। इस बार भी वन विभाग को 14 लाख से अधिक पौधे लगाने का लक्ष्य मिला है।
विभागीय जानकारी के अनुसार पौधारोपण के बाद अधिकांशत: बरसात के पानी पर निर्भर रहना पड़ता है। सिंचाई के लिए सात टैंकर हैं, लेकिन उनका उपयोग नर्सरी पौधशाला में किया जाता है। ऐसे में वर्ष 2010- 11 में बुंदेलखंड विशेष पैकेज के अंतर्गत बने चेकडैम का ही सहारा लिया जाता है। यह चेक डैम बबीना, चिरगांव सहित कई अन्य स्थानों पर बने हैं। उप प्रभागीय वनाधिकारी मधुर प्रकाश सक्सेना के मुताबिक प्राकृतिक बरसात पर निर्भर होने व सिंचाई सुविधाओं का अभाव होने से बांस, शीशम, सागौन जैसे पौधे लगाने पर जोर दिया जाता है।