‘झांसी शिल्प महोत्सव’ में शुक्रवार की शाम बुंदेली लोक संगीत और पंजाबी पॉप सिंगर रॉकी गिल ने दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया। बुंदेली कलाकार निशांत भदौरिया ग्रुप ने ‘उमर भई सोलह के पार...’ पर बुंदेली नृत्य किया।
सांस्कृतिक संध्या का आगाज नीरज एंड पार्टी ने गीतों से किया। नन्हे कलाकार अंशुल टुकवार ने सारंगी और सौरभ गोस्वामी ने तबला पर संगत दी। दर्शकों ने बच्चों की जुगलबंदी पर खूब तालियां बजाईं। इसके बाद मंच पर आए पंजाबी पॉप सिंगर रॉकी गिल, उन्होंने रैप सांग ‘मछली जल की रानी है...’ सुनाया। दर्शकों के बीच पहुंचकर उन्होंने अभिवादन किया। जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी... कई बार बोलकर उन्होंने दर्शकों से भी जय माता दी कहने का आह्वान किया, जिस पर सभी दर्शक भी उनके साथ जय माता दी... बोलने लगे। उन्होंने ‘कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है....’ सुनाया।
मुंबई में रहकर गायकी में नाम कमा रहे जौरी बुजुर्ग गांव के जयदेव ने गानों की प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने ‘मेरे रश्के कमर ...’ गीत गाया, झांसी के ही एक अन्य कलाकार रईस मंसूरी ने मो. रफी के नगमे सुनाए, मो. रफी की हूबहू आवाज में गाने सुनकर उनकी यादें ताजा हो गईं। झांसी के ही गायक विलियम माइकल ने ‘एक प्यार का नगमा है...’ फिल्मी गीत सुनाया। वंदना कुशवाहा ने राजस्थान का घूमर नृत्य प्रस्तुत किया। संजीवन राय ने ‘सावन के झूलों ने मुझको बुलाया, मैं परदेशी घर वापस आया...’ सुनाया। जीतू देवानंद ने कॉमेडी की।
कलाकारों का सम्मान 30 को
सांस्कृतिक कार्यक्रम में अब तक जो कलाकार प्रस्तुतियां दे चुके हैं। उनका सम्मान मुक्ताकाशी मंच पर 30 दिसंबर की शाम को किया जाएगा। यह जानकारी उपायुक्त उद्योग सुधीर कुमार श्रीवास्तव ने दी है।