ललितपुर। गर्मी का सीजन मुहाने पर खड़ा है। इसके बाद भी जल संस्थान की व्यवस्थाएं दुरुस्त नहीं हो पाई हैं। करीब दो साल से पटेल नगर स्कीम का सीडब्ल्यूआर (स्वच्छ जलाशय) क्षतिग्रस्त पड़ा है। वहीं, लोअर जोन का सीडब्ल्यूआर दयनीय अवस्था में है। वर्तमान में नेहरू नगर के सीडब्ल्यूआर के सहारे पूरे शहर की शुद्ध जल की आपूर्ति हो रही है। शहर के 13606 घरों के लोगों की प्यास बुझना मुश्किल हो रहा।
शहर में शुद्ध पेयजल आपूर्ति करने के लिए मोहल्ला तालाबपुरा के डोड़ाघाट में एक ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की है। यहां पटेल नगर स्कीम में वर्ष 2010-11 में 3200 किलोलीटर का सीडब्ल्यूआर बनवाया गया था जो दो वर्ष पहले नदी की बाढ़ की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गया था। इस सीडब्ल्यूआर से लोअर एवं हायर जोन के विभिन्न मोहल्लों में आपूर्ति होती है। इसके अलावा डोडाघाट स्थित 350 किलोलीटर का दूसरा सीडब्ल्यूआर भी खस्ताहाल में है। वर्तमान में नेहरू नगर के सीडब्ल्यूआर से वैकल्पिक व्यवस्था बनाते हुए पूरे शहर को जलापूर्ति की जा रही है। लोअर जोन के कुछ मोहल्लों में पानी की आपूर्ति के लिए नझाई बाजार स्थित 112.5 किलोलीटर के सीडब्ल्यूआर को उपयोग में लाया जा रहा है। इन सीडब्ल्यूआर से डोडाघाट, पटेल नगर, गांधीनगर व कसाई मंडी की टंकियों को भरा जाता है। इसके उपरांत टंकियों में भरे पानी को पाइपलाइन के माध्यम से लोगों के घरों तक पहुंचाया जाता है। पटेल नगर का सीडब्ल्यूआर खराब होने से नेहरू नगर के सीडब्ल्यूआर पर दबाव बना हुआ है। पटेल नगर के सीडब्ल्यूआर खराब होने से पटेल नगर, शांति नगर एवं आधे गोविंद नगर की जलापूर्ति पर बुरा असर पड़ रहा है। यदि यही हाल बना रहा तो गर्मी के सीजन में शहर के 13606 उपभोक्ताओं की प्यास बुझना मुश्किल हो जाएगा।
जिला योजना से बनाई गई वैकल्पिक व्यवस्था
खराब सीडब्ल्यूआर को दोबारा उपयोग में लेने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जा रही है। जल निगम द्वारा जिला योजना से इसका कार्य कराया गया है। वर्तमान में इसे जल संस्थान के हैंडओवर नहीं किया जा सका है।
नवीन सीडब्ल्यूआर को चाहिए पांच करोड़
नवीन सीडब्ल्यूआर के निर्माण के लिए पांच करोड़ रुपये की डिमांड प्रमुख सचिव नगर विकास से की गई है लेकिन जल संस्थान को धनराशि प्राप्त नहीं हो सकी है।
जल निगम ने सीडब्ल्यूआर का काम कराया है जो लगभग तैयार है। इसे गर्मी के सीजन में जलापूर्ति के दौरान उपयोग में लाया जाएगा। शासन से मांग के सापेक्ष धनराशि मिलने का इंतजार है।
संजीव कुमार, सहायक अभियंता, जल संस्थान