जौनपुर। महिलाओं की सुरक्षा के प्रति सरकार गंभीर है। महिलाओं के प्रति अपराध करने वालों को रोकने के लिए कानून को सख्त किया गया है। सूबे में दुराचारियों के सामाजिक बहिष्कार के लिए उनकी तस्वीर चौराहों पर लगाने का फैसला लिया गया है। इन प्रयासों के बाद भी अपनी सुरक्षा को लेकर महिलाएं भयमुक्त नहीं हो पाई हैं। यह तभी हो सकता है जब महिलाएं अपनी लड़ाई लड़ने के लिए खुद आगे आएं। यह बातें सोमवार को अमर उजाला के अपराजिता 100 मीलियन स्माइल्स के वेबिनार में महिलाओं ने कही।
‘ सुरक्षा: सरकार के प्रयास और महिलाओं की अपेक्षा’ विषय पर चर्चा में उन्होंने कहा कि जागरूकता से ही स्थिति बदली जा सकती है। ग्रामीण क्षेत्रों में तमाम महिलाओं को अधिकारों और कानूनी सहायता के बारे में ठीक से जानकारी नहीं है। ऐसे में वे आवाज उठाने से झिझकती हैं। इस किस्म का भय और झिझक जागरूकता से ही दूर होगी। बचपन में ही बालिकाओं में से संस्कार डालने की जरूरत है कि वे अन्याय का प्रतिरोध बेखौफ कर सकें। बेटे और बेटियों में भेद कम करना होगा। यदि बेटियां असुरक्षित महसूस करती हैं तो उन्हें अपनों से कहने में संकोच नहीं होना चाहिए। महिलाएं जब तक खुलकर नहीं बोलेंगी, तब तक अपराध के मामले कम नहीं होंगे। वेबिनार में डॉ रचना अग्रवाल, डॉ माया सिंह, डॉ अनीता सिंह, प्रीति गुप्ता, अन्नू त्यागी, निदहत फातिमा, मेघना रस्तोगी, वंदना दुबे, आकांक्षा मिश्र आदि ने हिस्सा लिया। डॉ. जाह्नवी श्रीवास्तव ने संचालन किया।