जौनपुर। ठंड का मौसम यों तो खाने-पीने वालों का काफी पसंदीदा होता है। लेकिन अस्थमा, हृदय रोग और कैंसर से पीड़ित लोगों के लिए यह मौसम समस्याएं खड़ी देता है। ऐसे में यदि सावधानी न बरती जाए अस्थमा का अटैक पड़ने की संभावना बढ़ जाती है।
चिकित्सकों की माने तो बदलते मौसम में अस्थमा के रोगियों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। सर्दियों में श्वास नलियां सिकुड़ने लगती है। जिसके कारण सांस लेने में दिक्कत आती है और सांस के मरीजों के लिए घातक साबित होता हैं। इससे बचाव के लिए घर को धूल और धुएं से दूर रहना चाहिए। गर्म कपड़ों से खुद को ढंककर रखें। बदलते मौसम में हर उम्र के लोग प्रभावित होते हैं। इस समय इलाज के लिए आने वाले 50 प्रतिशत लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। अस्थमा की चपेट में बच्चे भी आ सकते हैं जबकि सीओपीडी (क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज) की शिकायत उम्र दराज लोगों में देखने को मिलती है। जो प्रदूषण और स्मोकिंग के कारण बढ़ती है। इसमें फेफडे की मांस पेशियां मोटी हो जाती है। यह प्रोग्रेसिव डीजीज होती है। इसका प्रमुख कारण स्मोकिंग है।
अस्थमा का इलाज नहीं होने पर सीओपीडी का खतरा
जौनपुर। वरष्ठि हृदय रोग विशेषज्ञ डा. अरुण कुमार मिश्र का कहना है कि अस्थमा का इलाज करने पर ठीक हो जाता है। लेकिन सीओपीडी में काफी परेशानी होती है। यह फेफड़ों की बीमारी है। इसमें फेफडे़ की मांस पेशियां मोटी हो जाती है। जिससे मरीज को सांस लेने में परेशानी होती है। मरीजों को धूल, धुंआ, प्रदूषण और स्मोकिंग से बचना चाहिए।
यह है अस्थमा के लक्ष्ण
जौनपुर। किसी भी व्यक्ति को यदि सांस लेने में परेशानी होना, चलते समय अथवा सीढ़ी पर चढ़ते समय सांस फूलना, सीने में घरघराहट अथवा की सीटी की आवाज आना, खांसी का आना, आक्सीजन की कमी महसूस होना, हंसने अथवा बोलते समय खांसी आना, चलने में थकान महसूस होना ,
ि
नमोनिया की शिकायत बनी रहना, धूल और धुएं से एलर्जी होना अस्थमा के लक्षण हैं।
बरतें यह सावधानियां
-प्रदूषण से बचने के लिए नाक और मुंह ढंककर निकलें।
-स्मोकिंग और धुंआ से बचाव करना चाहिए।
-ठंड में गर्म कपडे़ पहने और सुबह शाम विशेष सावधानी बरतें।
-ठंडी चीजों को खाने से परहेज करना चाहिए।
-सुबह-शाम गर्म पानी का सेवन करना चाहिए।
-धूल वाले इलाके में जाने से बचना चाहिए।
- चिकित्सक से संपर्क कर समय से दवा लें ताकि परेशानी न बढे।
-------------------------------------