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पूर्वांचल विश्वविद्यालय में खुलेगा देश का सातवां भाषा केंद्र, हिंदी, संस्कृत तमिल और नेपाली की होगी पढ़ाई, शासन को भेजा प्रस्ताव

Sun, 20 Dec 2020 12:59 AM IST
स्‍वाधीन तिवारी अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर
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पूर्वांचल विश्वविद्यालय (फाइल फोटो) - फोटो : फाइल फोटो
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जौनपुर जिले के पूर्वांचल विश्वविद्यालय में शीघ्र ही भारतीय भाषा संस्थान का सातवां नया केंद्र खुलेगा। यहां हिंदी, संस्कृत के साथ ही तमिल और नेपाली भाषा भी सिखाई जाएगी। विद्यार्थियों के व्यक्तित्व विकास और उन्हें रोजगार परक शिक्षा देेने के मकसद से विश्वविद्यालय ने यह पहल की है। इसके लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेज दिया है। इस पर प्रारंभिक सहमति भी बन गई है।  

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नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार, उनके विकास और समृद्धि पर विशेष जोर दिया गया है। हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत के अलावा अन्य क्षेत्रीय और प्रांतीय भाषाएं रोजगार के लिहाज से भी बेहद उपयोगी हैं। विवि में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को डिग्री देने के साथ ही उन्हें रोजगार के नए अवसर मुहैया कराने के मकसद से पूर्वांचल विवि ने क्षेत्रीय भाषा केंद्र खोलने की दिशा में कदम बढ़ाया है।

इसके लिए पिछले दिनों प्रस्ताव तैयार कर उच्च शिक्षा विभाग को प्रेषित किया गया है। अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा मोनिका एस. गर्ग के साथ कुलपति प्रो. निर्मला एस मौर्य की बैठक हो चुकी है। इसमें केंद्र खोलने पर सहमति भी बनी है।
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प्रस्ताव में विश्वविद्यालय ने केंद्र में हिंदी, संस्कृत के अलावा तमिल और नेपाली भाषा का पाठ्यक्रम शुरू करने का उल्लेख किया है। विवि प्रशासन का दावा है कि शीघ्र ही इस केंद्र के अनुमति मिल जाएगी। इसके बाद औपचारिकताएं पूरी करते हुए इसे नए सत्र से शुरू किया जा सकता है।

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देश में पांच क्षेत्रीय केंद्र हैं स्थापित
भारतीय भाषाओं के विकास और उनकी समृद्धि के लिए मैसूर में 1969 में स्थापित भारतीय भाषा संस्थान के पांच क्षेत्रीय केंद्र वर्तमान में संचालित हैं। भुवनेश्वर, पुणे, मैसूर, पटियाला, गुवाहाटी में स्थित क्षेत्रीय केंद्रों में 15 भारतीय भाषाओं में प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। गोरखपुर में छठवां केंद्र खुलना है। 

विद्यार्थियों के लिए कारगर है त्रिभाषा सिद्धांत
रोजगार के लिए सरकार त्रिभाषा सिद्धांत को शुरू से बढ़ावा देती रही है। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और एक क्षेत्रीय भाषा के अध्ययन के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा है। नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के विकास पर विशेष जोर है। सरकार का मानना है कि विविध भाषाओं का ज्ञान न सिर्फ उन संस्कृतियों के करीब ले जाएगा, बल्कि परस्पर संबंधों को भी प्रगाढ़ करेगा।
विवि में विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के बहुमुखी विकास और उन्हें रोजगारपरक शिक्षा देने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। इसी के तहत विवि में क्षेत्रीय भाषा केंद्र खोलने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव के साथ प्रारंभिक चरण की बैठक भी हुई है। उम्मीद है कि शीघ्र ही अच्छी खबर सुनने को मिलेगी। 
प्रो. निर्मला एस. मौर्य, कुलपति, पूविवि
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