देश में पांच क्षेत्रीय केंद्र हैं स्थापित
भारतीय भाषाओं के विकास और उनकी समृद्धि के लिए मैसूर में 1969 में स्थापित भारतीय भाषा संस्थान के पांच क्षेत्रीय केंद्र वर्तमान में संचालित हैं। भुवनेश्वर, पुणे, मैसूर, पटियाला, गुवाहाटी में स्थित क्षेत्रीय केंद्रों में 15 भारतीय भाषाओं में प्रशिक्षण प्रदान कर रहे हैं। गोरखपुर में छठवां केंद्र खुलना है।
विद्यार्थियों के लिए कारगर है त्रिभाषा सिद्धांत
रोजगार के लिए सरकार त्रिभाषा सिद्धांत को शुरू से बढ़ावा देती रही है। इसके तहत अंतर्राष्ट्रीय, राष्ट्रीय और एक क्षेत्रीय भाषा के अध्ययन के लिए प्रोत्साहित किया जाता रहा है। नई शिक्षा नीति में भारतीय भाषाओं के विकास पर विशेष जोर है। सरकार का मानना है कि विविध भाषाओं का ज्ञान न सिर्फ उन संस्कृतियों के करीब ले जाएगा, बल्कि परस्पर संबंधों को भी प्रगाढ़ करेगा।
विवि में विद्यार्थियों के व्यक्तित्व के बहुमुखी विकास और उन्हें रोजगारपरक शिक्षा देने का पूरा प्रयास किया जा रहा है। इसी के तहत विवि में क्षेत्रीय भाषा केंद्र खोलने के लिए प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजा गया है। उच्च शिक्षा विभाग की अपर मुख्य सचिव के साथ प्रारंभिक चरण की बैठक भी हुई है। उम्मीद है कि शीघ्र ही अच्छी खबर सुनने को मिलेगी।
प्रो. निर्मला एस. मौर्य, कुलपति, पूविवि