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अफसर पैदा करती है इस गांव की मिट्टी

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10- गांव हमारी ताकत गद्दीपुर माधव पट्टी गांव में पुराना बरगद का पेड़। - फोटो : JAUNPUR
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जाफराबाद। जिला मुख्यालय से छह किलोमीटर दूर स्थित गद्दीपुर माधोपट्टी गांव को अफसरों के गांव के रूप में जाना जाता है। स्वतंत्रता से पहले से ही यहां के लोग प्रशासनिक सेवाओं में जाने लगे थे। अब तक इस गांव से 51 लोग आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, पीसीएस अफसर हो चुके हैं।
मो. मुस्तफा 1914 में डिप्टी कलेक्टर बने थे। तब से प्रशासनिक सेवा में इस गांव के लोगों के चयन का सिलसिला जारी है। सिविल सेवा की तैयारी करने वाले प्रतियोगी छात्रों के लिए माधोपट्टी गांव के लोग रोल माडल हैं। इस गांव से निकले होनहार भाभा एटामिक सेंटर, इसरो समेत देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवा दे रहे हैं। गांव के अंमजेय सिंह वर्ल्ड बैंक मनीला में, डा. निरू सिंह, लालेन्द्र प्रताप सिंह भाभा एटामिक सेंटर में वैज्ञानिक हैं। ज्ञानू मिश्रा इसरो में सेवाएं दे रहे हैं। इसी गांव के देवनाथ सिंह गुजरात में सूचना निदेशक हैं।
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चार हजार की आबादी वाले गद्दीपुर माधोपट्टी गांव में क्षत्रिय, यादव, मौर्य, खटीक, कुम्हार, नट, कायस्थ आदि जातियों के लोग रहते हैं। अफसरों के इस गांव में भी अधिकतर आबादी खेती पर निर्भर है। गांव में गेहूं, चना, मटर, अरहर, सरसों, आलू, मक्का, गन्ना आदि की खेती होती है। खेती के लिए गांव में 12 ट्रैक्टर हैं। 239 परिवार ऐसे हैं जो गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन करते हैं। 60 परिवार तो अंत्योदय की श्रेणी में हैं। गांव में 50 कुएं और 200 हैंडपंप लगे हैं। कुओं के पानी का इस्तेमाल अब पीने के लिए नहीं होता है। स्वच्छ भारत मिशन योजना के तहत 200 शौचालय का निर्माण कराया गया है और आठ परिवारों को आवास का लाभ भी मिल चुका है। आवास के लिए 23 परिवार प्रतीक्षा सूची में हैं। गांव में तीन प्राथमिक विद्यालय और एक जूनियर हाईस्कूल, दो इंटर कॉलेज हैं। वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार गद्दीपुर में साक्षरता की दर 67.11 प्रतिशत है।
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1914 से प्रशासनिक सेवा जाने का सिलसिला
जौनपुर। प्रख्यात शायर रहे वामिक जौनपुरी के पिता मोहम्मद मुस्तफा हुसैन 1914 में डिप्टी कलेक्टर बने थे। आजादी के बाद तो यहां के लोगों का प्रशासनिक सेवाओं में जाने का सिलसिला ही चल पड़ा। 1952 में इंदु प्रकाश सिंह आईएफएस बने। वे फ्रांस सहित कई देशों में राजदूत रहे। 1955 में आईएएस परीक्षा में 13वें स्थान पर रहे विनय कुमार सिंह बिहार के मुख्य सचिव रहे। 1964 में उनके दो सगे भाई क्षत्रपाल सिंह और अजय कुमार सिंह एक साथ आईएएस चुने गए। क्षत्रपाल तमिलनाडु के प्रमुख सचिव रहे। सूर्य प्रकाश सिंह, शशिकांत सिंह, शशिकांत के बेटे यशस्वी आईएएस, आशा सिंह, उषा सिंह, कुवंर चद्रमौल सिंह और उनकी पत्नी इंदू सिंह, अमिताभ सिंह व उनकी पत्नी सरिता सिंह आईपीएस हैं। जय सिंह, प्रवीण सिंह व उनकी पत्नी पारुल सिंह, रीतू सिंह, अशोक कुमार प्रजापति, प्रकाश सिंह, राजीव सिंह, राममूर्ति सिंह, विद्याप्रकाश सिंह, प्रेमचंद्र सिंह, महेंद्र प्रताप सिंह, संजीव सिंह, आनंद सिंह, शिवानी सिंह पीसीएस अफसर हैं।
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