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जगत के जीवों पर मंडराने लगे हैं संकट के बादल : स्वामी अंजनी नंदनदास

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शास्त्र पुराण वेद उपनिषद यज्ञ की महिमा से भरे पड़े हैं । प्रकृति ,धरती, आकाश व पाताल एक अदृश्य धार्मिक वैज्ञानिक शक्तियों से संचालित हो रही है। इसके पीछे यज्ञ की भी एक बड़ी भूमिका है, जो प्रकृति, समाज व आत्मा को साफ और संतुलित रखती है। लेकिन आज प्रकृति का संतुलन बिगड़ने से संसार के सभी जीवों पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिसके सभी बुद्धिजीवी वर्ग को चेतना जरूरी है, जिसमें धर्म-कर्म की बहुत बड़ी भूमिका है। उक्त बातें फलाहारी राष्ट्रीय संत श्री श्री 108 श्री स्वामी अंजनी नंदन दास महाराज ने बृहस्पतिवार को जगमलपुर स्थित श्री चंद्रजीत पूर्व माध्यमिक विद्यालय परिसर में आयोजित संत सम्मेलन में यज्ञ महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि।
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उन्होंने कहा कि अन्य पहलू दूसरों को सुख पहुंचाना और उसका हित करना है, उसके लिए जो भी कर्म किए जाते हैं । उसका नाम यज्ञ है। यज्ञ करने का अधिकार मनुष्य को ही परमात्मा ने दिया है। आज जगत के प्राणी पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। मानव का कर्तव्य बनता है कि वह सभी प्राणियों के कल्याण के लिए यज्ञ करें। जिससे एक अच्छे समाज, प्रकृति व वातावरण का निर्माण हो सके, इसके अलावा आए हुए अन्य संत ने प्रवचन दिया। संत सम्मेलन और महायज्ञ में दीक्षा संस्कार समारोह में हवन, पाठ, प्रवचन भजन संध्या, भंडारा जैसे कार्यक्रम हुए। संचालन भाजपा नेता ब्लॉक प्रमुख प्रतिनिधि सुनील कुमार यादव मम्मन ने किया। इस अवसर पर जगतगुरु सूर्याचार्य कृष्णा नंदन देव , मुक्तागिरी महाराज , महामृत्युंजय स्वामी ,महाराज पंडित लालचंद तिवारी, हनुमान दास, आचार्य मंडल पंडित भारत, राज्यमंत्री गिरीश चंद यादव, दुर्गेश सिंह, शरद सिंह, अजय सिंह, जितेंद्र सिंह ,चंदन यादव ,रमेश यादव, श्याम बाबू यादव, प्रकाश सिंह आदि मौजूद रहे।
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