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वाराणसी से भागी किशोरी सुल्तानपुर में मिली, युवक हिरासत में

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जौनपुर जिले के एक गांव की किशोरी को दूसरे समुदाय के युवक द्वारा बहला फुसला कर भगा ले जाने का मामला सामने आया है। बाद में पुलिस ने किशोरी को सुल्तानपुर जिले से बरामद कर लिया।
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क्षेत्र के एक गांव की किशोरी परिवार के साथ वाराणसी में रहती है। मंगलवार से वह लापता थी। खोजबीन के दौरान घरवालों को पता चला उसने किसी नंबर पर रिचार्ज कराया था। संदेह के आधार उस नंबर को ट्रेस करते घर वाले गांव के ही एक युवक के मकान पर पहुंचे और उसे कॉल किया तो युवक फोन पर बात करता हुआ बाहर निकल आया। जिस पर लोगों ने उसे पकड़ लिया। बाद में पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। पुलिस के अनुसार, युवक ने पूछताछ में बताया कि किशोरी सुल्तानपुर पहुंच चुकी है, वह भी उसके पास जाने के लिए निकल ही रहा था। इसके बाद पुलिस ने किशोरी को सुल्तानपुर जिले से बरामद कर लिया। पूछताछ के बाद किशोरी को उसके परिजनों को सौंप दिया गया। पूछताछ के दौरान युवक के पास कानपुर से बार-बार फोन आ रहा था जिस पर कोई पूछ रहा था कि लड़की को लेकर कहां पहुंचे हो। फिलहाल पुलिस आरोपी युवक को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है। इस संबंध में प्रभारी निरीक्षक विनोद मिश्र ने बताया कि तहरीर के आधार मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है।
प्रेमी युगल ने की शादी, मांगी सुरक्षा
परिवार के खिलाफ जाकर अलग-अलग समुदाय के प्रेमी युगल ने मंदिर में शादी रचा ली। दो समुदायों से जुड़ा मामला होने के कारण पुलिस दोनों को थाने ले गई। वहां उनके अभिभावकों को बुलाया गया। दोनों के अभिभावकों ने उन्हें अपनाने से मना कर दिया। दूसरी ओर प्रेमी युगल ने खुद की जान का खतरा बताते हुए सुरक्षा की मांग की है।
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बदलापुर तहसील क्षेत्र के एक गांव का एक युवक और पड़ोस के गांव की दूसरे समुदाय की युवती में प्रेम संबंध हो गया था। दोनों ने भागकर मंदिर में शादी कर ली। इसी बीच किसी ने इसकी जानकारी पुलिस को दे दी। इसके बाद पुलिस दोनों को लेकर थाने ले आई। थानाध्यक्ष ने दोनों के अभिभावकों को बुलाया। किंतु वे उन्हें स्वीकार करने को तैयार नहीं हुए। वहीं प्रेमी युगल ने पुलिस से गुहार लगाई कि उनकी जान को खतरा है। इस पर पुलिस ने दोनों को रात में थाने में ही रखा। बृहस्पतिवार की शाम तक बात न बनने पर दोनों को एसडीएम अभिताभ यादव के समक्ष प्रस्तुत किया गया। एसडीएम ने बताया कि मेरे पास ऐसा कोई संवैधानिक अधिकार नहीं है, जिससे मैं उन्हें सुरक्षा व्यवस्था दे सकूं। हालांकि एसओ को निर्देशित किया गया है कि इनकी सुरक्षा का ध्यान रखें।
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