जौनपुर। आचार्य कौटिल्य संघर्ष समिति द्वारा बृहस्पतिवार को वैचारिक संगोष्ठी का आयोजन सिद्धार्थ उपवन में किया गया था। जिसमें आचार्य चाणक्य एवं भगवान परशुराम के आदर्शों का अनुसरण करते हुए ब्राह्मण समाज ने राजनीति में अपनी भागीदारी को मजबूत करने का निर्णय लिया है।
‘उत्तर प्रदेश की राजनीति में ब्राह्मण समाज की भूमिका’ विषयक संगोष्ठी के संयोजक सुशील उपाध्याय ने कहा कि आज ब्राह्मण समाज की राजनीतिक हैसियत बढ़ाने की जरूरत है। समाज के सभी वर्गों ने धर्म संस्कृत बचाने के लिए लड़ाई लड़ी परंतु ब्राह्मण वर्ग ही था जिन्होंने युद्ध के साथ सनातन धर्म की रक्षा की है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रवाद और सनातन धर्म की रक्षा करने वाले वर्ग को आज सम्मान का भूखा होना पड़ रहा है। हमें अपने महापुरुषों के बताए हुए मार्ग पर चलकर अपने सम्मान को पुनर्स्थापित करने की जरूरत है।
कार्यक्रम के प्रारंभ में गोष्ठी का विषय प्रवर्तन करते हुए वरिष्ठ पत्रकार डॉ मधुकर तिवारी ने कहा कि आज समाज के हर वर्ग के निशाने पर ब्राह्मण समुदाय है। राजनीतिक तौर पर केवल वोट बैंक रह गया है। कभी यह वर्ग राजनीति नेतृत्व करता था। उस नेतृत्व को पुर्नस्थापित करने के लिए समाज को एकजुट होना पड़ेगा। डॉ अर्चना शुक्ला ने ब्राह्मणों की रक्षा पर बल देते हुए कहा कि शक्ति अर्जन के लिए राजनीतिक प्रभाव बढ़ाने हेतु एकमत एक मंच पर होने की आवश्यकता है। इस मौके पर विजय प्रकाश तिवारी, रवींद्र मिश्र, पंकज मिश्र, रामचंद्र मिश्र, दिनेश शुक्ल ,राकेश मिश्र, मंगला राम यज्ञ पांडे, सुभाष शुक्ला, कमलेश राम यज्ञ मिश्र आदि मौजूद थे। अध्यक्षता गिरजा प्रसाद तिवारी, संचालन अवनींद्र तिवारी तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ ब्रम्हेश शुक्ल ने किया।