पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और बसपा विधायक सुखदेव राजभर बुधवार दोपहर 12 बजे रामघाट पर पंचतत्व में विलीन हो गए। उनके पुत्र कमलाकांत उर्फ पप्पू ने मुखाग्नि दी। इस दौरान पूर्व विधानसभा अध्यक्ष को अंतिम विदाई देने के लिए घाट पर जनसैलाब उमड़ा।
सुखदेव राजभर चार बार बसपा से आजमगढ़ के लालगंज विधानसभा क्षेत्र से विधायक रहे हैं। इसके बाद नए परिसीमन में बने दीदारगंज विधानसभा क्षेत्र में उनको पहली बार 2012 में सपा के आदिल शेख से हार मिली थी। लेकिन 2017 के विधानसभा चुनाव में फिर से वह दीदारगंज से बसपा से लड़े और विधायक चुने गए थे। सुखदेव राजभर बसपा सरकार के कार्यकाल में विधानसभा अध्यक्ष पद पर रहे। इसके अलावा माध्यमिक शिक्षा मंत्री व अन्य महत्वपूर्ण पदों पर काम किया। उनका शव मंगलवार की रात आजमगढ़ के बड़गहन स्थित पैतृक आवास पर ले जाया गया था। रात में ही प्रशासन को जानकारी मिली की उनका अंतिम संस्कार रामघाट पर किया जाएगा। प्रशासनिक अधिकारी सुबह नौ बजे तक रामघाट पर पहुंच गए थे। एडीएम भू-राजस्व राज कुमार द्विवेदी, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट हिमांशू नागपाल, तहसीलदार महेंद्र कुमार, ईओ संतोष कुमार मिश्रा आदि पहुंच गए। पूरे घाट की सफाई कराई गई। पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सुखदेव राजभर की शवयात्रा दोपहर 12 बजे रामघाट पहुंची। जहां कंधा देने और अंतिम दर्शन करने के लिए जन सैलाब उमड़ पड़ा। ज्वाइंट मजिस्ट्रेह हिमांशू नागपाल की अगुवाई में उन्हें राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। अंतिम दर्शन के लिए बिहार के राज्यपाल फागू चौहान, उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री अनिल राजभर, बसपा के प्रदेश अध्यक्ष राम अचल राजभर, पूर्व मंत्री जगदीश नारायण राय, दारा चौहान, विधायक शैलेंद्र यादव ललई, पाणिनी सिंह, सपा जिलाध्यक्ष लाल बहादुर यादव, पूर्व विधायक गुलाब चंद्र सरोज, डा. अवध नाथ पाल, राज बहादुर यादव, राहुल त्रिपाठी, संजय सरोज, जावेद सिद्दीकी, डा. दीप चंद्र राम आदि मौजूद रहे।