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भ्रष्टाचार का गढ़ बन गई है एसटीपी योजना,जिम्मेदार कर चुके हैं करोड़ो का खेल: गौतम गुप्ता

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नमामि गंगे योजना तहत जिले में एसटीपी योजना भ्रष्टाचार का गढ़ बन गया है। जिम्मेदार अभी तक इसमें करोड़ों का खेल कर चुके हैं। वे इस योजना में पहले बैरिकेटिंग के नाम पर लाखों रुपये का गोलमाल किए हैं। वहीं अब कार्यदायी संस्था पर देर से कार्य करने के लिए लगाए गए पेनाल्टी में भी गड़बड़झाला किए हैं। अब तक कार्यदायी संस्था से जुर्माना से जहां तक डेढ़ करोड़ रुपये से अधिक वसूल किया जाना चाहिए था। वहीं मात्र नौ लाख 87 हजार रुपये वसूल किए गए हैं। उक्त बातें स्वच्छ गोमती अभियान के अध्यक्ष गौतम गुप्ता ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट परिसर स्थित पत्रकार भवन में पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहीं।
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उन्होंने कहा कि शहर का गंदा पानी गोमती नदी में नहीं गिरे और गंदे पानी को शोधित करने के लिए एसटीपी का निर्माण किया जा रहा है। नमामि गंगे योजना तहत बन रहे बेहद कम क्षमता के एसटीपी व अमृत योजना तहत डाले जा रहे सीवर कार्य में वित्तीय व तकनीकी भ्रष्टाचार की बात स्वच्छ गोमती अभियान की ओर से शुरू से ही उठाई जा रही है। साथ ही संस्था की ओर से इस योजना में जल निगम, कार्यदायी फर्म व उनके संरक्षणदाताओं द्वारा किये गए भ्रष्टाचार से सरकार व जिला प्रशासन को लगातार अवगत कराते चला आ रहा है। इनके मिलीभगत 30 दिसंबर 2020 को मुख्य अभियंता ने जौनपुर में एसटीपी कार्य में हो रही देरी को देखते हुए कार्यदायी फर्म पर 65,840 रुपये प्रतिदिन (लगभग 19.5 लाख रुपये प्रतिमाह) के हिसाब से पेनाल्टी तय की गई, जिसे तब तक चलना था जब तक कि कार्यदायी फर्म द्वारा तय सीमा के भीतर अपेक्षित कार्य की गति व प्रतिशत प्राप्त नहीं कर लिया जाता। लेकिन अधिशासी अभियंता जलनिगम की ओर से फर्म को 22 फरवरी को किये गए छठवें बिल के भुगतान में मात्र 15 दिन की पेनाल्टी 9,87,600 रुपये काटे गए हैं। जबकि फरवरी माह के भुगतान में ही फर्म के बिल से 48 दिन की पेनाल्टी लगभग 38 लाख रुपये कटा जाना चाहिए था। इसी क्रम में फर्म को किये गए अगले बिल के भुगतान के दौरान 24 मईमें फर्म की पेनाल्टी को शून्य कर दिया गया, जबकि अब तक फर्म से लगभग एक करोड़ रुपये की पेनाल्टी वसूला जाना चाहिए था।
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