मड़ियाहूं नगर पंचायत में प्रधानमंत्री शहरी आवास योजना के तहत आवास बनवाने के नाम पर अवैध वसूली होने और मामले में पीओ डूडा की ओर से अनियमितता बरतने की शिकायत सही पाई गई, जिस पर नामित अधिकारी एडीएम भू व राजस्व राज कुमार द्विवेदी ने जांच रिपोर्ट शनिवार को डीएम को सौंप दी है। इसमें शिकायत सही पाए जाने पर पीओ डूडा को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और विभागीय जांच कराकर उनको दंडित करने तथा शिकायतकर्ता के ऊपर दर्ज एफआईआर को वापस लेने की संस्तुति की है।
मड़ियाहूं नगर पंचायत के भंडरिया टोला निवासी संतोष कुमार गुप्ता ने 24 मई को डीएम से आनलाइन शिकायत की थी कि डूडा के जेई दयानंद यादव पीएम शहरी आवास के लिए लाभार्थियों से 15 से 20 हजार रुपए की वसूली कर रहे हैं। डीएम ने पीओ डूडा अनिल कुमार वर्मा को जांच करने का निर्देश दिया। इस दौरान उन्होंने 19 जून को डीएम को रिपोर्ट सौंपी, जिसमें शिकायतकर्ता के संतुष्ट हो जाने की बात कही। फिर शिकायतकर्ता ने 21 जून को आनलाइन डीएम से शिकायत किया कि जांच अधिकारी पीओ डूडा द्वारा झूठ बोला जा रहा है। उन्होंने न तो मुझे कोई सूचना दी और न ही फोन पर मुझसे बात की। मामले में उच्चस्तरीय अधिकारी से जांच कराने की मांग करने के बावजूद पीओ डूडा ने 17 जुलाई को हमारे विपक्षी और आवास के लाभार्थी निर्मला देवी, संजू देवी, प्रमिला देवी, मुन्नी देवी और माधुरी देवी को कार्यालय में बुलाकर बयान दर्ज कर लिया, जबकि यह सभी लोग हमारे सह खातेदार हैं और इनसे न्यायालय में भूमि का मुकदमा भी लंबित है। 29 जुलाई को मेरे खिलाफ ही आवास के नाम पर अवैध वसूली करने का आरोप लगाते हुए मड़ियाहूं थाने में एफआईआर दर्ज करा दिया गया। जिसके बाद डीएम ने फिर मामले की जांच के लिए एडीएम भू व राजस्व राज कुमार द्विवेदी को नामित किया। एडीएम ने मामले की जांच कर 21 पन्नों की अपनी जांच रिपोर्ट बीते शनिवार को डीएम को सौंपी, जिसमें शिकायत सही पाई गई, जबकि पीओ डूडा की मामले में जांच के दौरान की गई कार्रवाई गलत पाई गई। इस दौरान जांच अधिकारी ने पीओ डूडा को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और विभागीय जांच कराकर उनको दंडित करने तथा शिकायतकर्ता के उपर दर्ज एफआईआर को वापस लेने की संस्तुुति की है। एडीएम भू राजस्व राजकुमार द्विवेदी का कहना है कि शिकायतकर्ता की ओर से आवास में अवैध वसूली किए जाने की शिकायत सही पाई गई। मामले में पीओ डूडा की ओर से तथ्यों को छिपा कर शिकायतकर्ता को दोषी ठहराते हुए उसके ऊपर एफआईआर दर्ज कराने का मामला सही पाया गया है। जिसे गंभीरता से लेते हुए प्रस्तुत रिपोर्ट में पीओ डूडा को निलंबित कर उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने और विभागीय जांच कराकर उनको दंडित करने तथा शिकायतकर्ता के ऊपर दर्ज एफआईआर को वापस लेने की संस्तुति की गई है।