उमरपुर मोहल्ले में लगा कूड़े का ढेर।
नगर पालिका प्रशासन की लापरवाही से ढाई लाख लोगों की जिंदगी खतरे में पड़ गई है। पूरा शहर कूड़े के ढेर से पटा रहता है। जिधर देखिए उधर ही सड़कों पर कूड़ा बिखरा हुआ दिखाई देता है। स्थिति यह है कि कूड़े की गंदगी की वजह से शहर को संक्रामक बीमारियों ने जकड़ लिया है। शहर के हर दस घर पर कोई न कोई संक्रामक रोगों की चपेट में है।
बावजूद नगर पालिका प्रशासन की नींद अभी खुली नही है। करीब ढाई लाख की जनसंख्या वाले इस शहर में 31 वार्ड हैं। इन वार्डो में अधिकतर वार्डो की दशा खराब है। न तो सड़के ठीक हैं और न ही नालियां साफ हैं। और तो और इन मोहल्लों से निकलने वाला कूड़ा सड़क पर ही पड़ा रहता है।
लोगों की माने तो आठ से दस दिन बाद उनके मोहल्ले से कूड़ा हटाया जाता है। प्रतिदिन शहर में 192 टन कूड़ा/कचरा निकलता है। इसके निस्तारण की कोई व्यवस्था नही है। सड़क के किनारे ही इसे ऐसे तैसे फेंक दिया जाता है। इसकी सड़न और गलन से दुर्गंध इस कदर उठती है कि उधर से गुजरने वाले लोग नाक दबाकर निकलते हैं।
नगर पालिका के पास 25 वाहन हैं जिसमें दस बड़े और 15 छोटे वाहन हैं। जबकि 522 सफाई कर्मचारी तैनात किए गए हैं। इसमें 211 रेगुलर, 74 संविदा पर और 137 ठेके पर हैं। बावजूद इसके शहर की गंदगी दूर होने का नाम नही ले रही है। जिस गली में घुसिए उसी गली में सड़क पर कूड़ा पड़ा हुआ है।
इसके लिए स्थानीय नागरिक भी कम जिम्मेदार नही हैं। क्योंकि नगर पालिका ने जो कंटेनर जगह-जगह रखा है उसमें लोग कूड़ा नही फेंकते। सड़क पर ही घर की गंदगी फेंककर चले जाते हैं। उन्हें दूसरों की सुविधा असुविधा से कोई मतलब नही है।
इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष दिनेश टंडन ने कहा कि शहर के सभी मोहल्लों एवं सड़कों की प्रतिदिन सफाई कराई जाती है। फिर भी कहीं गंदगी दिख रही है तो उसे साफ सफाई करा दिया जाएगा। शहर को सुंदर व स्वच्छ बनाने में लोगों का सहयोग भी जरूरी है।