जौनपुर। महंगाई की मार पेट्रोल-डीजल के साथ-साथ खाने पीने की चीजों पर पड़ रही है। इससे आमजन की जेब ढीली हो गई है। सब्जी फल दूध समेत विभिन्न खाद्य सामग्रियों के दाम बढ़ने से गृहणियों का रसोई बजट बिगड़ गया है। इससे लोगों की थाली का स्वाद बिगड़ने लगा है। महंगाई में गृहस्थी की गाड़ी चलाना गृहणियों के लिए अब चुनौतिपूर्ण साबित हो गया है।
पेट्रोल, डीजल रसोई गैस सिलेंडर का दाम बढ़ने से आमजन की जेब ढीली हो गई है। महंगाई का असर अब हर वर्ग पर पड़ने लगा लेकिन मध्यमवर्गीय परिवारों का बजट गड़बड़ाने लगा है। पहले जिन घरों में दो लीटर दूध आ रहे थे, अब एक लीटर में ही काम चलाया जा रहा है। इसके अलावा, फलों से लेकर सब्जियों में कटौती की है। इसकी वजह से अब वह अपनी सूझबूझ से घर के बजट का बचत कर रही है। इसके लिए कई ने अपने खाने का मेन्यू बदला है तो कई कुछ सामान को बजट से बाहर किया है। पेट्रोल 107, डीजल 98 रुपये प्रति लीटर बिक रहा है। वहीं, रिफाइंड तेल 170, सरसों का तेल 180, फलों में अनार 140, संतरा 100, सेब 160 रुपये किलो बिक रहा है। जबकि दूध 40 से 60 रुपये प्रति किलो बिक रहा है। इन सामानों के कीमतों में बेतहाशा वृद्धि से आमजन की परेशानी बढ़ गई है। खाद्य सामग्री विक्रेता प्रवेश गुप्ता ने बताया कि खाद्य सामग्रियों की कीमत कंपनियों से बढ़कर आ रही है, उसी के अनुसार बिक्री की जा रही है।
पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस के दाम में लगातार हो रही वृद्धि से आम जनमानस की परेशानी बढ़ गई है। दैनिक प्रयोग में आने वाली वस्तुओं के दामों में वृद्धि बनी हुई है। यदि ऐसे ही महंगाई बढ़ती रही तो जनता के सामने भारी संकट आने से कोई रोक नहीं पाएगा। - प्रतिमा सिंह, कड़ेरेपुर
महंगाई की मार से लोगों का जीवन बेपटरी हो गया है। पेट्रोलियम पदार्थों के दाम बढ़ने से दैनिक जीवन में प्रयोग किए जाने वाले सभी वस्तुओं के दाम आसमान छूने लगे हैं। इससे निम्न और मध्यमवर्गीय के परिवार के लोगों का जीवन यापन मुश्किल हो गया है। - आराधना जायसवाल, बदलापुर
पेट्रोलियम दाम में वृद्धि से आमजन पर बोझ बढ़ गया है। नमक से लेकर, चावल, गेहूं, दाल, चीनी, रिफाइंड के साथ ही कपड़ा, जूता, रेडीमेड कपड़ा के दामों में भी वृद्धि हुई है। सब्जी के दाम तो आसमान छू रहे हैं। इससे घर का खर्च चलाना मुश्किल होता जा रहा है। - सुमन सिंह, ऊदपुरगेल्हवा
रसोईं गैस, पेट्रोल डीजल और सब्जी की आसमान छूती कीमतों के चलते घर चलाने में मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पति की मृत्यु के बाद उम्र के इस पड़ाव पर इतनी महंगाई में कैसे परिवार का जीविकोपार्जन कर रही हूं। इसका अंदाजा सरकार नहीं लगा सकती। - तशरीफुन्नीशां, लाइन बाजार