करीब आधे घंटे तक मरीज को लेकर परिजन वहां रुके रहे, मगर उन्हें लौटना पड़ा। मिशन जिंदगी के संस्थापक दिलीप तिवारी ने पूरे मामले से डीएम को अवगत कराया। उन्होंने भी अस्पताल के डॉक्टरों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन किसी ने बात करने की भी जहमत नहीं उठाई। दिलीप ने इस पूरे मामले की शिकायत लिखित रूप से मुख्यमंत्री कार्यालय में की है। डीएम मनीष कुमार वर्मा ने जांच की बात कही है।
इलाज के लिए भटकते रहे परिजन, महिला ने तोड़ दिया दम
मुफ्तीगंज निवासी एहसान अली की पत्नी हसीना बेगम (52) की तबीयत शनिवार को खराब हुई। उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। अचानक ऑक्सीजन लेवल 60 के नीचे आ गया था। आनन-फानन में परिजन उन्हें लेकर जिला अस्पताल आए, जहां बेड न होने की दलील देकर भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। मरीज को निजी अस्पताल ले जाने की सलाह दी गई। परिजन जब नईगंज के निजी अस्पताल पहुंचे तो ऑक्सीजन न होने के कारण भर्ती नहीं किया गया। यहां से वह सिटी स्टेशन रोड स्थित दूसरे निजी अस्पताल ले जा रहे थे, तब तक महिला की मौत हो गई। परिजनों का कहना है कि अगर समय रहते उपचार किया गया होता तो महिला की जान बच सकती थी। इस बाबत सीएमएस डॉ. एके शर्मा का कहना था कि महिला की कोविड जांच नहीं हुई थी। उसकी हालत भी गंभीर थी। कोई भी बेड खाली न होने के कारण भर्ती नहीं ली जा सकी।