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जिला पंचायत अध्यक्ष चुनाव: अपना दल की दावेदारी से उलझे समीकरण, भाजपा की बढ़ी चिंता

Fri, 04 Jun 2021 12:35 AM IST
गीतार्जुन गौतम अमर उजाला नेटवर्क, जौनपुर

सार

जौनपुर में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए घमासान तेज हो गया है। अपना दल के छह सदस्यों में दो महिलाएं निर्वाचित हैं। वहीं, बाहरी पर भी दांव लगाने की चर्चा तेज है।
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भाजपा - फोटो : Getty
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विस्तार
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जौनपुर जिला पंचायत अध्यक्ष पद का चुनाव तिथि के एलान से पहले ही रोचक होता जा रहा है। सपा, भाजपा के बाद अध्यक्ष पद के लिए अपना दल-एस ने भी उम्मीदवार उतारने की घोषणा कर सबको चौंका दिया है। प्रदेश व केंद्र की सरकार में भाजपा के सहयोगी दल की घोषणा ने न सिर्फ सत्ताधारी दल की मुश्किलें बढ़ाई हैं, बल्कि नए समीकरणों को भी आधार दिया है। राजनीतिक विश्लेषक इसके कई निहितार्थ निकाल रहे हैं।

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83 सदस्यों वाले जिला पंचायत में अध्यक्ष की कुर्सी पर महिला का बैठना तय है। इस आरक्षण के अनुसार ही सभी दिग्गजों और दलों ने उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतारे थे। परिणाम के बाद की स्थिति में भाजपा के पास दस सदस्य हैं। इनमें सात महिलाएं हैं। बसपा के भी दस सदस्य निर्वाचित हुए हैं, जबकि अपना दल-एस के छह सदस्यों ने जीत दर्ज की है। आप, उलेमा कौंसिल, एआईएमआईएम के भी सदस्य चुनाव जीतने में कामयाब हुए हैं।

वहीं, चुनाव में किसी भी प्रत्याशी को समर्थन न देने वाली सपा जीत के बाद 40 से अधिक कार्यकर्ताओं के सदन में पहुंचने का दावा कर रही है। इसी दावे के आधार पर जीत का आंकड़ा पाने के लिए सपा ने करंजाकला ब्लाक से निर्वाचित निशी यादव को उम्मीदवार घोषित किया है। भाजपा में अभी किसी नाम पर सहमति नहीं बनी है, मगर पार्टी के अंदरखाने में खुटहन और जलालपुर ब्लाक से निर्वाचित महिला को ही प्रत्याशी बनाने की चर्चा जोरों पर है। बाहुबली पूर्व सांसद धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला सिंह वार्ड नंबर 45 से चुनी गई हैं।

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उनका भी चुनाव लड़ना तय है, मगर यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह निर्दल मैदान में उतरेंगी या किसी दल के समर्थन पर। उनकी उम्मीदवारी को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बीच अपना दल-एस के भी जौनपुर से उम्मीदवार उतारने की घोषणा से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।

सरकार में सहयोगी अपना दल-एस के छह सदस्यों को भाजपा अब तक अपने साथ मान रही थी। अब पार्टी नेतृत्व के तेवर से उनकी चिंता बढ़ गई है। अपना दल के खेमे से दो महिलाएं चुनी गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी किसी बाहरी पर भी दांव लगा सकती है। भाजपा की चिंता का यही सबसे बड़ा कारण भी है। ऐसा होने पर चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है।
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