उनका भी चुनाव लड़ना तय है, मगर यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि वह निर्दल मैदान में उतरेंगी या किसी दल के समर्थन पर। उनकी उम्मीदवारी को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बीच अपना दल-एस के भी जौनपुर से उम्मीदवार उतारने की घोषणा से राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
सरकार में सहयोगी अपना दल-एस के छह सदस्यों को भाजपा अब तक अपने साथ मान रही थी। अब पार्टी नेतृत्व के तेवर से उनकी चिंता बढ़ गई है। अपना दल के खेमे से दो महिलाएं चुनी गई हैं। माना जा रहा है कि पार्टी किसी बाहरी पर भी दांव लगा सकती है। भाजपा की चिंता का यही सबसे बड़ा कारण भी है। ऐसा होने पर चुनावी मुकाबला बेहद दिलचस्प हो सकता है।