दिनेश ने बताया कि रविवार सुबह करीब सात बजे जब प्रधानमंत्री ने कॉल किया तो वे गुजरात के पंचमहल कलोल कस्बे के बाहर टैंकर खड़ा कर चाय की प्रतीक्षा में थे। मध्यम वर्गीय परिवार के दिनेश इंटर तक की पढ़ाई के बाद अपने बड़े भाई कमलेश उपाध्याय के पास आ गए थे।
कमलेश भी खुद ऑक्सीजन टैंकर चलाते हैं। मलगांव स्थित कंपनी का वाहन चलाते हुए उन्हें कभी दिक्कत महसूस नहीं हुई। गांव में उनकी पत्नी निर्मला, बेटा आर्यन (18), दो बेटियां सोनी (16) व प्रीति (10) रहती हैं। चार भाइयों में वे दूसरे स्थान पर हैं।
जौनपुर के दिनेश उपाध्याय
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करीब पांच मिनट की वार्ता में प्रधानमंत्री ने दिनेश के काम को सराहा, हौसला बढ़ाया और इससे दूसरों को प्रेरणा लेने की बात कही। पीएम मोदी से बात कर दिनेश भी गदगद हैं। उनका कहना है कि उन्हें अपने काम का इनाम मिल गया है। दिनेश ने बताया कि वह पिछले 15-17 वर्षों से टैंकर चला रहे हैं।
पहले उनके काम को कोई महत्व नहीं मिलता था। लोग सामान्य रूप से चालकों जैसा व्यवहार करते थे। जाम में घंटों खड़ा रहना होता था। अब लोग उन्हें महत्व देते हैं। जाम में प्रशासन उनके वाहन को विशेष व्यवस्था कर निकलवाता है।
दिनेश ने बताया कि अस्पताल में ऑक्सीजन लेकर पहुंचते तो काफी सम्मान भी मिलता है और इससे भी ज्यादा खुशी व तसल्ली तब मिलती है, जब हमारे ऑक्सीजन की वजह से किसी की जान बचती है। मरीज के परिवार वाले हाथ उठाकर अभिवादन करते हैं और ताली बजाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आपका (दिनेश) काम प्रशंसनीय है। आप परिवार की चिंता छोड़कर देश और समाज के लिए काम कर रहे हैं। लाखों लोगों का जीवन बचा रहे हैं। कोरोना के समय मे आपकी जिम्मेदारी बढ़ गई है। मुझे आप जैसे लोग पूरे निष्ठा से अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए देश की सेवा कर रहे हैं।