हत्या मामले में मुकदमा दर्ज कराने के लिए सड़क जाम करते ग्रामीण।
- फोटो : jaunpur
सरपतहा थाना क्षेत्र के अतरडीहा गांव के युवक अखिलेश यादव की हत्या के 20वें दिन पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज किया। वह भी तब जब गुस्साए ग्रामीणों ने लखनऊ-बलिया मार्ग तीन घंटे तक जाम कर दिया। इससे पहले पुलिस केस दर्ज करने में आनाकानी कर रही थी और मौत का कारण ट्रेन से कटना बता रही थी।
अतरडीहा गांव निवासी राजेंद्र यादव का 23 वर्षीय पुत्र अखिलेश 24 सितंबर को दोपहर बाल कटाने के लिए घर से निकला था। शाम तक घर नहीं लौटा तो उसकी खोजबीन शुरू हुई। अगले दिन 25 सितंबर को शाहगंज कोतवाली क्षेत्र के दादर पुल के निकट झाड़ी में उसका शव मिला था। उसके शरीर पर कई जगह धारदार हथियार के निशान भी थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट लगने से उसकी मौत का मामला सामने आने के बाद भी पुलिस केस दर्ज करने से कतराती रही। वह युवक के ट्रेन से कट कर मौत होने की बात करती रही। हालांकि शरीर पर गंभीर चोट को देखते हुए परिवारीजनों ने हत्या की आशंका जताई थी। लेकिन पुलिस ने इस बिंदु को दरकिनार कर दिया।
घटना के 20वें दिन शनिवार को परिजनों के साथ ग्रामीणों का भी गुस्सा फूट गया। सराय मोहिद्दीनपुर बाजार में सैकड़ों की संख्या में पहुंचे लोगों ने लखनऊ-बलिया मार्ग पर तीन घंटे तक जाम लगा दिया। पुलिस ने लोगों को समझाने की कोशिशें की लेकिन लोग एफआईआर की कापी हाथ में मिलने से पहले जाम खत्म करने को राजी ही नहीं हुए। आखिरकार एसपी अतुल सक्सेना ने सीओ शाहगंज महेंद्र सिंह देव को निर्देश दिया तो अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का केस दर्ज कर पुलिस ने एफआईआर की कॉपी ग्रामीणों को सौंपा। इस पर ग्रामीणों ने जाम खत्म कर दिया। जाम के दौरान लोग पुलिस और सत्ता पक्ष के एक मंत्री के खिलाफ नारे भी लगा रहे थे।