शिक्षक और अधिकारियों की माने तो पुरानी एजेंसी से पुराने बचे काम लिए जा रहे हैं। जबकि नई एजेंसी को मूल्यांकन और रिजल्ट बनाने के लिए लगाया गया है। यूपी डेस्को एजेंसी करीब छह साल तक विवि में मूल्यांकन और रिजल्ट का कार्य देखती रही। एजेंसी के कार्य के चलते ही कई वर्ष तक रिजल्ट समय से जारी हुआ और पूविवि को रिजल्ट घोषित करने के लिए प्रदेश में पहला स्थान मिला था।
प्रमुख सचिव उच्च शिक्षा जितेंद्र कुमार ने समय रिजल्ट घोषित करने के लिए पूविवि को बधाई दी थी। पिछले साल थ्योरी की करीब 35 लाख और प्रैक्टीकल की करीब आठ लाख कापियों का मूल्यांकन हुआ था। जबकि इस साल हर विषय के एक या दो कापियों का ही मूल्यांकन कराया गया है। स्नातक व स्नातकोत्तर के केवल अंतिम वर्ष की ही परीक्षाएं कराई गई हैं।
पूविवि के परीक्षा नियंत्रक वीएन सिंह ने बताया कि पूविवि. की मुख्य परीक्षा के मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने के लिए दो एजेंसियां काम कर रही हैं। दोनों को जिम्मेदारी सौंपी गई है। रिजल्ट तैयार करने में कहां से गड़बड़ी हुई है मुझे इसकी जानकारी नहीं है। मैं छुट्टी पर हूं।
कुलपति प्रोफेसर निर्मला एस मौर्य ने कहा कि एजेंसियों को काम के लिए इनवाइट किया जाता है और इनके रेट लिए जाते हैं। जिसका रेट सबसे कम होता है उसी से काम लिया जाता है। पुरानी एजेंसी कम पैसे पर काम कर रही है और नई एजेंसी को अधिक पैसा दिया जा रहा है। इस सवाल पर कुलपति ने कहा कि यह परीक्षा नियंत्रक का काम होता है। हम लोग कोशिश करते हैं कि जो भी खरीदारी हो या कुछ भी हो उसके कोटेशन लिए जाएं। उनकी तुलना की जाए, उसमें से जो कम हो उसे काम दिया जाए। मुझसे पैसे या रेट से कोई मतलब नहीं होता है। ये सरकारी एजेंसियां हैं इनके काम का जो रेट होता है उसका एग्रीमेंट होता है, जो प्रोसीजर के हिसाब से तय किया जाता है। विश्वविद्यालय मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने का तरीका बदल चुका है। अब कोडिंग और डिकोडिंग कराई जाती है, ताकि मूल्यांकन और परीक्षा की पारदर्शिता बनी रहे।