जौनपुर। जिले में अधिकांश परिषदीय विद्यालयों के छात्र-छात्राओं को ई-पाठशाला का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इस समस्या को देखते हुए शिक्षकों ने मोहल्ला पाठशाला शुरू कर दिया है। यह व्यवस्था धीरे-धीरे तेजी पकड़ रही है। उधर, परिषदीय विद्यालयों के बच्चों के समक्ष पुस्तकों का भी संकट है। उन्हें अभी तक पढ़ने के लिए पुस्तकें ही वितरित नहीं की जा सकी हैं। इसके चलते अधिकांश बच्चे बगैर पुस्तक के ही पढ़ाई कर रहे हैं। हालांकि कुछ बच्चों के पास पुरानी किताबें उपलब्ध हैं।
कोरोना की दूसरी लहर में संक्रमण कम होने पर एक जुलाई को जिले के दो हजार 807 परिषदीय विद्यालय खोल दिए गए हैं। हालांकि सिर्फ शिक्षक ही विद्यालय पहुंच रहे हैं। परिषदीय विद्यालयों में नामांकित चार लाख 13 हजार 729 विद्यार्थियों को विद्यालय आने पर फिलहाल रोक है। उन्हें दूरदर्शन, मिशन प्रेरणा पोर्टल व व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से ऑनलाइन शिक्षा दी जा रही है। हालांकि यह व्यवस्था भी जिले में कारगर साबित नहीं हो पा रही है। इसे देखते हुए मोहल्ला पाठशाला संचालित की जा रही है। ताकि मोबाइल आदि की व्यवस्था न हो पाने पर विद्यार्थी पठन-पाठन से दूर न होने पाएं। इसके लिए सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए मोहल्ला पाठशाला का संचालन शुरू कर दिया गया है। इस व्यवस्था में अब तेजी भी आने लगी है। इसके तहत शिक्षक विद्यालय आने के बाद गांव में ही उपयुक्त स्थान देखकर छात्र-छात्राओं को जगह-जगह अपने स्तर से पढ़ा-लिखा रहे हैं। मगर, यहां पढ़ने आने वाले अधिकांश बच्चों के हाथों में किताबें नहीं होती हैं। कुछ के पास किताबें हैं भी तो वह पुरानी हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ.गोरखनाथ पटेल का कहना है कि 13 लाख पुस्तकें आ चुकी हैं। इसके सत्यापन का काम चल रहा है। चार - पांच दिन में यह प्रक्रिया पूरी करके पुस्तकें ब्लॉक मुख्यालयों पर भेज दी जाएंगी। वहां से पुस्तकें विद्यालयों में भेजी जाएंगी। ताकि बच्चों को वितरित जा सकें।
जिले के लिए 34 लाख पुस्तकों की मांग की गई है
बेसिक शिक्षा विभाग ने जिले के लिए शासन से 34 हजार पुस्तकों की मांग की थी। अभी तक 13 लाख किताबें ही प्राप्त हुई हैं। पठन-पाठन का कार्य चल रहा है। जाहिर है सभी बच्चों को पुस्तकें नहीं मिल पाएंगी। उधर, पुस्तकें तो कम हैं ही, साथ ही जो उपलब्ध हैं, उनमें भी कई विषयों की पूरी किताबें नहीं हैं। इसका असर भी बच्चों की पढ़ाई पर पड़ने की संभावना है।